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डेढ़ साल से टूटी पुलिया बनने का इंतजार, प्रशासन बना रोड़ा

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दुधवा-चंदनचौकी मार्ग पर बननी है पुलिया
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इंडो-नेपाल बॉर्डर पर पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है मार्ग
लखीमपुर खीरी। दुधवा-चंदन चौकी मार्ग पर डेढ़ साल पहले पुलिया टूट गई थी लेकिन अभी तक इसका निर्माण नहीं कराया गया। टूटी पुलिया पर मिट्टी की बोरियां डालकर किसी तरह आवागमन बहाल किया गया लेकिन बारिश आने तक आवागमन बाधित हो जाएगा। जिससे चंदन चौकी समेत करीब 25 ग्राम सभाओं का संपर्क पलिया मुख्यालय से कट सकता है। तो वहीं सड़क हादसा होने की संभावना भी बढ़ जाएगी। इसका पर्यटन के लिहाज से भी विपरीत असर पड़ेगा।
पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन ने पुलिया निर्माण न होने पर दुधवा नेशनल पार्क के अधिकारियों को जिम्मेदार बताया जो निर्माण कराने में अड़ंगा लगा रहे हैं। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर दुधवा नेशनल पार्क के सीमा क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति (थारू) बाहुल्य करीब 25 ग्राम सभाएं हैं इसलिए दुधवा-चंदन चौकी मार्ग प्रमुख है। इसके अलावा चंदन चौकी में ही एकीकृत जनजाति विकास परियोजना का मुख्यालय और कोतवाली स्थित है और दुधवा-चंदन चौकी मार्ग का स्वामित्व पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड तीन के पास है। ऐसे में निर्माण खंड ने एक वर्ष पहले नई पुलिया (दो/छह मीटर साइज) बनाने के लिए करीब 80 लाख स्वीकृत कराया था लेकिन इसके निर्माण कार्य में अवरोध पैदा किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन योगेंद्र सिंह कहते हैं कि एक साल से पुलिया निर्माण कार्य शुरू कराने के प्रयास किए गए लेकिन डीडी दुधवा की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया है। साथ ही पार्क क्षेत्र में नए निर्माण कार्य पर रोक है लेकिन पुराने क्षतिग्रस्त कार्य को दोबारा कराने से भी रोका जा रहा है। उधर, पार्क के डीडी मनोज सोनकर से बातचीत असफल रही।
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इन गांवों के लोग हो रहे प्रभावित
दुधवा-चंदन चौकी मार्ग पर पुलिया टूट जाने से चंदन चौकी समेत 25 गांवों के हजारों लोग प्रभावित हैं। प्रभावित गांवों में मसानखंभ, सौनहा, ध्यानपुर, बंदरभरारी, धुस्किया, पचपेड़ा, परसिया, मंगलपुरवा आदि शामिल हैं।
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दुधवा-चंदन चौकी मार्ग पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड तीन का स्वामित्व है, जिसके क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत कार्य कराया जाता है। पुलिया डेढ़ वर्ष पहले क्षतिग्रस्त हुई थी, जिसके निर्माण के लिए एक साल पहले बजट भी मिल चुका है। पार्क प्रशासन के अधिकारी निर्माण कार्य में अटकलें लगा रहें हैं, जिससे निर्माण नहीं हो पा रहा है। कोई भी हादसा होने पर पार्क प्रशासन जिम्मेदार होगा।
-योगेंद्र सिंह, एक्सईएन, निर्माण खंड तीन
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