तिकुनिया (लखीमपुर खीरी)। उच्च प्राथमिक विद्यालय जसनगर क्योटली के कई बच्चे दो दिन से मिड डे मील नहीं खा रहे हैं। इसका कारण अनुसूचित जाति की रसोइया द्वारा खाना बनाना बताया जा रहा है। प्रधानाचार्य रसोइया के अनुसूचित जाति का होने के मामले में खामोश हैं तो ग्राम प्रधान बच्चों के भोजन न करने की पुष्टि तो कर रही हैं पर अनुसूचित जाति के मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहीं। गंभीर बात यह है कि अधिकतर बच्चे दो दिन से मिड डे मील नहीं खा रहे, इस संबध बीएसए को कोई जानकारी नहीं है।
ग्राम पंचायत जसनगर क्योटली के उच्च प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को मिड डे मील बना। कुछ बच्चों ने इसे ले लिया। मगर, अधिकतर बच्चों ने लेने से मना कर दिया। बताते हैं कि स्कूल में कुछ दिन पूर्व नई रसोइया कुसमा देवी और रीमा को रखा गया है। चर्चा है कि इनके अनुसूचित जाति का होने के कारण बच्चे उनके हाथ का बना मिड डे मील नहीं खा रहे। प्रधानाचार्य इस्लामुद्दीन का कहना है कि कुछ अभिभावक नई रसोइया रखे जाने से नाराज हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में 400 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें से सोमवार को 212 बच्चे आए, जिसमें से 65 ने ही मिड डे मील का भोजन लिया और अन्य ने लेने से इंकार कर दिया। अनुसूचित जाति की रसोइयों के बाबत प्रधानाचार्य का कहना है पहले से तैनात रसोइयों के त्यागपत्र देने के बाद जिन दो रसोइयों को रखा गया है वह अनुसूचित जाति की हैं। इस तरह की हीन भावना बच्चों के दिमाग में पैदा करना गलत है। इसके पीछे गांव के कुछ लोगों की साजिश है। इस मामले में अभिभावक बोलने से इंकार कर रहे हैं तो ग्राम पंचायत जसनगर क्योटली के प्रधान पति बलकार सिंह का कहना है कि सोमवार को कुछ बच्चों के और मंगलवार दोपहर दो बजे तक बच्चों ने भोजन न करने की जानकारी मिली है। अनुसूचित जाति के मुद्दे पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।
बच्चों के मिड डे मील न करने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कुछ है तो इसके बारे में प्रधानाचार्य को जानकारी देनी चाहिए थी। बुधवार को इसकी जानकारी करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- बुद्धप्रिय सिंह, बीएसए
परिषदीय स्कूल के बच्चों ने खाने का बहिष्कार किया इसकी अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। बुधवार को मामले की जांच कराकर समस्या का समाधान कराएंगे।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी