धौरहरा। घाघरा नदी के कटान के चलते खीरी और बहराइच की सीमा पर विवाद उत्पन्न हो गया। जिससे कुछ भू-माफिया सक्रिय हो गये और वन विभाग की भूमि को अपना बताकर वन भूमि पर कब्जा कर लिया। वन क्षेत्राधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेकर शासन को पत्र लिखा, जिस पर खीरी और बहराइच की वन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें गठित कर वन भूमि का चिह्नीकरण किया गया। इस कार्रवाई से भू माफिया खेमे में अफरातफरी मच गई है।
बहराइच सीमा से सटे गुलरिया तालुके अमेठी और जंगल गुलरिया में घाघरा नदी के कटान के चलते सीमा विवाद उत्पन्न हो गया था। बता दें कि धौरहरा तहसील क्षेत्र की गुलरिया, तालुके अमेठी और नानपारा बहराइच तहसील क्षेत्र की जंगल गुलरिया की जमीन नदी में कट गई और इन ग्राम सभा में वन भूमि भी नदी में समा गई थी। जब नदी ने पटान किया तो जमीन फिर से उपजाऊ हो गई, अब यही पर कुछ भू-माफिया भी सक्रिय हो गए। जिन्होंने कुछ किसानों की भूमि के साथ ही सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर भी कब्जा कर लिया। मामले को संज्ञान में लेकर वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने वन भूमि चिह्नीकरण के लिए शासन को पत्र लिखा जिस पर मंगलवार को बहराइच और खीरी की वन विभाग और राजस्व विभाग की टीमें गठित कर भूमि का चिह्नीकरण शुरु किया गया। जिससे सक्रिय भू माफियाओं में अफरातफरी मची हुई है।
भू-कटान की वजह से खीरी और बहराइच की वन भूमि में सीमा विवाद था। कुछ लोगों ने अवैध कब्जा भी कर रखा था। राजस्व टीमों के साथ हमारी टीम भी चिह्नीकरण कर रही है। साथ ही वन भूमि मुक्त कराकर पौधरोपण कराया जाएगा।
-अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी धौरहरा