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कुत्ता काटे तो जिला अस्पताल मत आना

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लखीमपुर खीरी। कुत्ता, बंदर काटे तो जिला अस्पताल मत आना। मरीज को लगने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) जिला अस्पताल में खत्म हो चुकी है। एक सप्ताह से मरीज वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल की दौड़ लगा रहे हैं। एआरवी स्टॉक निल होने का जवाब सुनकर कुछ मरीज जहां घर लौट जा रहे हैं तो कई पीड़ित बाजार से महंगे दाम में वैक्सीन खरीदकर जिला अस्पताल में वैक्सीन लगवा रहे हैं।
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पिछले कुछ दिनों से कुत्तों में काटने की प्रवृत्ति बढ़ने लगी है। इस कारण जिला अस्पताल में एआरवी इंजेक्शन लगवाने की खातिर पीड़ितों की भीड़ बढ़ने लगी है। मगर, जिला अस्पताल में 16 फरवरी से एआरवी खत्म हैं। स्टोर इंचार्ज एवं फार्मासिस्ट आरके गुप्ता ने इसकी सूचना नोटिस बोर्ड पर चस्पा भी कर दी है। एआरवी लगवाने के लिए रोजाना सौ से अधिक लोग अस्पताल आ रहे हैं। वहां पर वैक्सीन न होने की जानकारी मिलने पर कुछ लोग तो लौट जाते हैं तो कुछ लोग बाजार से खरीदकर लगवा लेते हैं। जो लोग बाजार से वैक्सीन खरीदकर ले आते हैं तो उनसे अस्पताल कर्मी पर्चे पर लिखवा लेते हैं। कुछ लोगों को टिटनेस का टीका लगाकर चलता कर देते हैं तो कुछ को सात दिन तब कुत्ते का पीछा करने की सलाह देते हैं।

प्रतिदिन लगाई गई वैक्सीन पर एक नजर
15 फरवरी-120
14 फरवरी- 88
13 फरवरी-112
12 फरवरी-100
11 फरवरी-112
10 फरवरी-164

डॉक्टर दे रहे कुत्ते का पीछा करने की सलाह
जिला अस्पताल भले ही वैक्सीन की व्यवस्था न कर पा रहा हो। मगर, पीड़ित और उनके घरवालों को कुत्ते का पीछा करने की सलाह जरूर दे रहा है। डॉक्टर पीड़ितों से कहते हैं सात दिन तक कुत्ते का पीछा करो और देखो कि वह मरा है कि नहीं। यदि कुत्ता मरे जाए तभी वैक्सीन लगवाने की जरूरत है, क्योंकि रैबीज होने की दशा में ही कुत्ता सात से आठ दिन में मर जाता है।
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ये बरतें सावधानी
कुत्ता खा पी रहा हो तो उसके करीब न जाएं, पिल्ले साथ होने पर कुतिया के पास कदापि न जाएं, लड़ते समय भी इनसे दूर रहें, कुत्ते के नजदीक पहुंचने के बाद दौड़े नही, बच्चों को कुत्ते की पूंछ, कान न खींचने दें।

ऐसे होता है रैबीज
जानवर जैसे कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने पर उनकी लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रैबीज नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। रैबीज सीधा मानसिक संतुलन खराब कर देता है। इससे पीड़ित का अपने दिमाग पर संतुलन नहीं रहता है।

रैबीज 20 साल तक ले सकता है गिरफ्त में
रैबीज होने पर इसका कोई इलाज नहीं है। समय पर वैक्सीनेशन ही इससे बचाव है। यह रोग 20 साल तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। इसलिए कुत्तों से सावधान रहें। इधर-उधर इलाज कराने के बजाय 24 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवाएं।

लक्षण
रैबीज से पीड़ित को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। उसके मुंह से लार निकलती रहती है और वह रोशनी से डरता है। स्थिति यहां तक बिगड़ जाती है कि पीड़ित भौंकने भी लगता है।

उपचार
रैबीज की रोकथाम के लिए अस्पताल में एआरवी वैक्सीन मुफ्त में लगाए जाते हैं। नियमत: 24 घंटे के अंदर पहली डोज लग जानी चाहिए। तीन दिन बाद दूसरी, सात दिन बाद तीसरी, 14 दिन बाद चौथी और 28 दिन बाद पांचवीं डोज लगवाएं।

लाल मिर्च नहीं इंजेक्शन लगवाएं
गांवों में कुत्ता काटने की जगह पर लाल मिर्च पीसकर लगा देते हैं जबकि यह गलत है। इससे ठीक होने के बजाय घाव में संक्रमण होने का खतरा रहता है। कुत्ता या फिर अन्य जानवर ने जिस जगह पर काटा हो वहां पर 5 से 10 मिनट पर सीधी पानी की धार गिराएं। इसके बाद 24 घंटे के अंदर एंटी रैबीज वैक्सीन अवश्य लगवाएं।
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- डॉ. राजेंद्र कुमार, पशु चिकित्सक

पोता अरनव को रात में कुत्ते ने काट लिया था। अस्पताल में बता रहे हैं कि वैक्सीन नहीं है। एक दो दिन बाद फिर आकर देखेंगे।
-रामवती निवासी राजापुर

कुत्ते ने काटा था। वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल आए थे, लेकिन यहां पर टिटनेस वाला इंजेक्शन लगाया है।
-ओम प्रकाश वर्मा निवासी प्योरपुर

बेटी मुस्कान को बंदर ने कल काट लिया था। अस्पताल आने पर पता लगा कि वैक्सीन ही नहीं है। एक दो दिन बाद आने को कहा है।
-सुनील कुमार निवासी परसेहरा

एआरवी समाप्त हो गई है। कई बार कॉरपोरेशन को पत्र लिखा, लेकिन दस दिन बीत गए अब तक वैक्सीन नहीं मिली।
-डॉ. एसके मिश्रा, प्रभारी सीएमएस
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