लखीमपुर खीरी। दूषित खाने के बाद दो दिन में छह गोवंश की मौत होने के मामले में सदर कोतवाली में संत समागम के आयोजक पर रिपोर्ट दर्ज हो गई है। हिंदू संगठन के पदाधिकारी अब आयोजक की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वहीं एक गोवंश का ही पोस्टमार्टम कराए जाने से विहिप और बजरंग दल कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि सभी गोवंश की मौत का कारण स्पष्ट होना चाहिए।
बता दें कि संत निरंकारी मिशन का संत समागम 12 दिसंबर को युवराजदत्त महाविद्यालय के मैैदान पर हुआ था। इसमें करीब 50 हजार अनुयायी शामिल हुए थे। समागम में आए सेवादारों के लिए लंगर का इंतजाम था। बताते हैं कि सत्संग समाप्त होने के बाद जो खाना बचा उसे मैदान के एक कोने में डलवा दिया गया। इसे मैदान में घूमने वाले गोवंश ने खा लिया, जिससे करीब 20-22 गोवंशों की हालत बिगड़ गई। इससे चार की मौत हो गई जबकि 14 गंभीर रूप से बीमार हो गए। गोवंश के मरने की सूचना पर मौके पर पहुंचे हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस पर सदर एसडीएम के निर्देश पर पशु चिकित्साधिकारी ने टीम के साथ मौके पर जाकर बीमार गोवंशों का इलाज करना शुरू कर दिया। हिंदू संगठन के पदाधिकारियों की मांग पर एक गोवंश का पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें मौत का कारण एक्यूट रिव्यूनल एसीडीसिस आया। इस पर बजरंग दल के सह विभाग संयोजक अनुज तिवारी ने संत निरंकारी मिशन के प्रवेश कुमार साहनी को नामजद करते हुए सदर कोतवाली में तहरीर दी थी। इस पर पुलिस ने 429 और 269 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
आयोजक की गिरफ्तारी की मांग
गोवंशों की मौत के जिम्मेदार समागम के आयोजक हैं। उनकी लापरवाही से ही गोवंश की मौत हुई है। कोतवाली पुलिस जल्द ही इनकी गिरफ्तारी करें। अन्यथा धरना प्रदर्शन के लिए मजबूर होना होगा।
-बृजेश पांडे, सह संयोजक, विहिप
सफाई कराने की आयोजक की थी जिम्मेदारी
धार्मिक आयोजन के लिए मैदान नि:शुल्क दिया जाता है। ऐसे में आयोजक की जिम्मेदारी बनती थी कि समागम समाप्त होने के बाद मैदान की सफाई कराकर बचा हुआ भोजन हटवाते। भोजन का मैदान में फेका जाना उनकी लापरवाही प्रतीत करता है।
-डॉ. डीएन मालपानी, प्राचार्य
युवराज दत्त महाविद्यालय
एआरए बना मौत का कारण
कुल छह गोवंश की मौत हुई है। पोस्टमार्टम सिर्फ एक ही हुआ। मौत का कारण एक्यूट रिव्यूनल एसीडोसिस है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की अधिकता वाला भोजन करने से गैस बनती है। इससे पेट फूल जाता है और मल पतला हो जाता है। सांस लेने में दिक्क्त होती है। ऐसे में जान भी जा सकती है।
-डॉ. राजेंद्र कुमार, पशु चिकित्साधिकारी