चैत्र नवरात्र की शुरुआत 22 मार्च से होगी। इस बार पूरे नौ दिन तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होगी। इनका समापन 30 मार्च को होगा। मां दुर्गा नाव की सवारी पर आ रही हैं। इनकी विदाई डोली पर होगी। नवरात्र पर शुक्ल और ब्रह्म योग का विशेष संयोग भी बन रहा है।
लखीमपुर खीरी के देवकली स्थित श्रीमती चंद्रकला आश्रम के महंत प्रमोद दीक्षित ने बताया कि इस बार नवरात्र में विशेष संयोग बन रहे हैं। माता के नौका पर सवारी करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने बताया कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का शुभारंभ 21 मार्च की रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा ।
समापन 22 मार्च 2023 रात 08 बजकर 20 मिनट पर होगा। ऐसे में घट स्थापना 22 मार्च को होगी। उन्होंने बताया घट स्थापना के लिए द्विस्वभाव (मीन) लग्न सर्वोत्तम माना गया है, जो सुबह 05 बजकर 54 मिनट से 07 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा दूसरा शुभ मुहूर्त द्विस्वभाव (मिथुन) लग्न 10 बजकर 45 मिनट से 01 बजकर 01 मिनट तक है।
इन दिनों में बन रहे विशेष योग
श्रीमती चंद्रकला आश्रम के महंत के मुताबिक नवरात्र में तीन सर्वार्थ सिद्धि योग 23, 27 एवं 30 मार्च को बन रहा है। जबकि अमृत सिद्धि योग 27 और 30 मार्च को बन रहा है। रवियोग 24, 26 एवं 29 मार्च को लगेगा। नवरात्र के अंतिम दिन गुरु पुष्य योग भी रहेगा। उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन अत्यंत दुर्लभ संयोग शुक्ल और ब्रह्म योग बन रहा है। ब्रह्म योग 22 मार्च की सुबह 09 बजकर 18 मिनट से 23 मार्च की सुबह 06 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
शुक्ल योग 21 मार्च की रात 12 बजकर 42 मिनट से अगले दिन सुबह 09 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।चैत्र नवरात्र के शुभारंभ के साथ नव संवत्सर लग रहा है। इस वर्ष के राजा बुद्ध और मंत्री शुक्र होंगे। जिसके चलते शिक्षा क्षेत्र में विकास के अवसर मिलेंगे और महिलाओं का भी विशेष उत्थान इस साल दिखाई पड़ेगा।