घर के बाहर मौजूद बृजभान और राजकिशोर के परिवारीजन-संवाद
मितौली। इस्राइल-ईरान के बीच सीजफायर के बाद उड़ानें शुरू होने की खबर से कस्ता क्षेत्र के उन 22 परिवारों में हलचल तेज हो गई है, जिनके अपने इस्राइल में फंसे हैं। शादियों के सीजन में अपनों के घर लौटने की उम्मीद ने जहां खुशी बढ़ाई है, वहीं वीजा प्रक्रिया की अड़चन अब भी चिंता का कारण बनी हुई है। मितौली थाना क्षेत्र के गांव गनेशपुर निवासी राणा प्रताप दो वर्ष पहले रोजगार के सिलसिले में इस्राइल गए थे। उन्होंने फोन पर परिजनों को बताया कि 11 अप्रैल से उड़ानें शुरू होने की संभावना है। यह खबर मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके बेटे अंकित सिंह की 27 अप्रैल को शादी है, जिसमें उनके शामिल होने की उम्मीद अब और मजबूत हो गई है।
गांव में शादी की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, लेकिन एक ही सवाल सबके मन में है कि क्या राणा प्रताप समय पर घर पहुंच पाएंगे? उनकी 90 वर्षीय मां फुलिया देवी हर आने-जाने वाले से यही पूछ रही हैं कि अब बेटा आ जाएगा न? परिजन उन्हें भरोसा दिला रहे हैं कि हालात तेजी से सुधर रहे हैं।
पत्नी सावित्री देवी ने बताया कि सीजफायर के बाद उम्मीद जगी है, लेकिन एंट्री वीजा सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। उनका कहना है कि अगर कागजी प्रक्रिया समय पर पूरी हो गई, तो वह जरूर घर पहुंचेंगे।
सिर्फ राणा प्रताप का परिवार ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के कई अन्य परिवार भी इसी इंतजार में हैं। धर्मेंद्र सिंह अपने छोटे भाई की शादी में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। कस्ता कॉलोनी निवासी राजकिशोर की पत्नी सुनीता ने बताया कि उनसे रोज बात होती है और वह सुरक्षित हैं। ब्रजभान की पत्नी भगीरथी ने भी कहा कि उनके पति सुरक्षित हैं और सीजफायर के बाद घर लौटने की उम्मीद बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार स्तर पर मदद मिले और वीजा प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, तो कई परिवारों की खुशियां पूरी हो सकती हैं। संवाद