दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर से कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजनाएं शुरू की गईं लेकिन जिले में इन्हें सफलता नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि कई बार विभाग को इसके लिए आवेदन निकालने पड़े हैं पर तमाम प्रयासों के बावजूद विभाग लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर पा रहा है।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और किसानों को रोजगार देने के उद्देश्य से शासन ने कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजनाएं शुरू कीं। योजनाओं का जो स्वरूप है उसके अनुसार कामधेनु डेयरी इकाई की स्थापना के लिए 1.20 करोड़ तथा मिनी कामधेनु डेयरी इकाई की स्थापना के लिए 52 लाख रुपये लागत रखी गई है। पशु पालन विभाग ने जिले के लोगाें से आवेदन मांगे थे। योजना के तहत लागत की 25 प्रतिशत धनराशि उद्यमी को स्वयं जमा करनी थी तथा शेष 75 प्रतिशत के लिए बैंक से ऋण लेना था। सुचारू रूप से ऋण की मूलधन की आदायगी होते रहने पर ब्याज की अदायगी पशु पालन विभाग को करनी थी। पशुपालन विभाग ने जिले में पांच कामधेनु और 30 मिनी कामधेनु डेयरी स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। कामधेनु डेयरी योजना में सिर्फ चार लोगों का ऋण स्वीकृत हो पाया, इसमें भी दो इकाई स्थापित हो सकीं। इसी प्रकार मिनी कामधेनु डेयरी में 22 आवेदकों का ऋण स्वीकृत हुआ लेकिन अब तक केवल 13 इकाइयां ही स्थापित हो सकी हैं।
फिर बढ़ी आवेदन की तिथि
कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजना के लिए विभाग ने लक्ष्य पूरा करने के लिए फिर आवेदन मांगे, लेकिन आवेदन नहीं आए। विभाग ने इसके लिए फिर आवेदन की तिथि बढ़ा दी है। अब इच्छुक उद्यमी 25 जून तक आवेदन कर सकेंगे।
क्या हैं दिक्कतें
जिले में कामधेनु डेयरी की लागत 1.20 करोड़ तथा मिनी कामधेनु डेयरी की लागत लगभग 52 लाख है। इसमें छोटे किसान आगे आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसके लिए कामधेनु में लगभग 25 लाख तथा मिनी कामधेनु में 13 लाख रुपये लाभार्थी को मार्जिन मनी के रूप में जमा करने होते हैं यह धनराशि छोटे और मझोले किसानों के लिए जुटा पाना दिक्कत का काम है। इसके अलावा बैंकों से ऋण प्राप्त कर पाना भी किसानों के लिए आसान बात नहीं है। इस सबके अलावा इतनी बड़ी योजना के लिए अन्य संसाधन जुटाने में भी किसानों को दिक्कत होती है। यही कारण है कि विभाग को आवेदक नहीं मिल रहे हैं।
पूरा हो जाएगा लक्ष्य
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.एसपी सिंह ने बताया कि बड़ा प्रोजेक्ट होने के कारण किसान हिम्मत नहीं कर पाते। फिर भी उम्मीद है कि इस बार लक्ष्य पूरा हो जाएगा।