दूसरे दिन मौके पर नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
कटान पर लगाम लगाने का दावा हुआ भोथरा
राहत आयुक्त के दौरे के दूसरे दिन किसी अधिकारी ने पीड़ितों का हाल जानने का प्रयास नहीं किया और न ही कटान स्थल का जायजा लिया। जबकि कटान रोकने के प्रयास में जुटे सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नदी की धार को काबू में कर लेने का दावा किया है। वहीं ग्रामीणों मे बेचैनी और भय का माहौल है।
फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा नदी कहर बरपा रही है। मिलपुरवा बंधे के अंदर बसे मानपुर, बेड़हासुतिया और जंगल नंबर 11 के कई घरों को नदी निगल चुकी है। नदी का रुख गूम की ओर होता देख ग्रामीणों में हाहाकार मच गया था। वहीं प्रशासन भी सकते मे आ गया। इससे विस्थापितों की आवाज दूर तक गूंजी। प्रदेश सरकार के आदेश पर शनिवार को लखनऊ मंडल के राहत आयुक्त डीके सिंह कटान का हाल जानने जिले में आए थे। उन्होंने शनिवार को गूम, बेड़हासुतिया गांवो का भ्रमण कर कटान स्थल का मौका मुआयना किया था। उन्होंने विस्थापितों का हाल जाना और जिले के अधिकारियों को राहत में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। काम में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की बात भी कह गए। रविवार को कोई अधिकारी फूलबेहड़ नहीं पहुंचा। विस्थापितों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया। हालांकि कटान रोकने में जुटे सिंचाई विभाग के इंजीनियरों और मजदूरों ने जरूर पसीना बहाया। इंजीनियर अशोक द्विवेदी और मुकर्रम अली ने बताया कि रविवार को छह जीओ ट्यूब और बंबू कैरेट में काफी संख्या में रेत की बोरी डाली गई है। इससे नदी की धार अब काबू में है। वहीं एसडीओ बीबी सिंह ने कटान पर काबू कर लेने का दावा किया है।
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कुछ देर बंद करना पड़ा काम
महेवागंज। राहत आयुक्त की ओर से कटान स्थल का मौका मुआयना करने के कुछ घंटे बाद ही शनिवार की देर शाम ग्रामीणों ने राहत स्थल पर हंगामा कर कार्य रुकवा दिया। अपने गांव की ओर कटान रोकने की बात कहते हुए ग्रामीणों के दो गुट आमने सामने आ गए। काफी देर हंगामा होता रहा। इंजीनियरों को कुछ देर तक राहत कार्य रोकना पड़ गया। मामले की पुलिस को सूचना दी गई। एसओ आनंद शाही ने ग्रामीणों को समझाकर शांत कराया। इससे काफी देर बाद राहत कार्य शुरू हो पाया। रविवार को भी पुलिस कार्यस्थल पर मुस्तैद रही।