लखीमपुर खीरी। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में खुशहाली तो जताई गई है मगर खुशी की बातें गिनती की बताई गईं हैं। मसलन टैक्स स्लैब में राहत, बैंक में रखी जाने वाली राशि की गारंटी एक से बढ़ाकर पांच लाख आदि घोषणाएं गिनती की हैं तो अन्य लोकलुभावन योजनाएं धरातल पर उतरने के बाद ही समझ में आने वाली हैं।
टैक्स स्लैब मे राहत से नौकरीपेशा लोग खुश हैं। बजट में मेक इन इंडिया से असेंबल इन इंडिया की ओर बढ़ने की बात कही गई है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। बजट में किसान ट्रेन चलाने की बात कही गई है, जिसको लेकर किसानों में उम्मीद जगी है। इसी प्रकार सिंचाई के लिए सोलर पंप मुहैया कराने की स्कीम से किसानों को उम्मीद है कि महंगे डीजल से छुटकारा मिलेगा। दूध और मछली उत्पादन और बिक्री के लिए विशेष प्रयास किए जाने की बात से पशुपालकों और मत्स्य पालकों में भी बेहतरी की उम्मीद जगी है। व्यापारियों ने बजट को ठीकठाक बताया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि लोकलुभावन योजनाएं धरातल पर उतरें तभी इसका लाभ मिल सकेगा। सरकार को योजनाएं लागू करने के लिए भी खासा जोर देना होगा, जिससे लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। इधर, विपक्षी दलों के नेताओं ने बजट को निराशाजनक बताया है और कहा कि किसानों और आम लोगों के लिए बजट में कुछ खास नहीं है। युवाओं को नौकरियां देने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं।
कुल मिलाकर बजट सभी के लिए आशादायी है। इनकम टैक्स में सात लाख से ज्यादा आय वाले करदाताओं को कम टैक्स देना होगा। इलाज की सुविधा बढ़ेगी और देश भर में 100 नए एयरपोर्ट बनाने से व्यापारिक यात्रा सरल होगी।
-संजय अग्रवाल, व्यापारी नेता
मध्यमवर्ग के लिए राहत देने वाला बजट है। टैक्स स्लैब में वृद्धि करके सरकार ने मुराद पूरी कर दी है। व्यापारियों के लिए बजट में कोई खास प्रावधान न किए जाने से थोड़ी निराशा भी है। किसानों के लिए सरकार ने पिटारा खोला है, जिसका लाभ व्यापारियों को भी मिलेगा।
-संजय गुप्ता, व्यापारी नेता
नौकरीपेशा वर्ग के लिए बजट काफी अच्छा है। टैक्स स्लैब में राहत मिलने की उम्मीद पूरी हुई है। जिससे देश की जनता को आयकर में फायदा मिलेगा।
-अंशुमान सिंह, नौकरीपेशा
आम बजट मध्यमवर्ग और किसानों के लिए उम्मीदों वाला है। किसानों की योजनाओं से बाजार को मजबूती मिलेगी, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था की मजबूती पर पड़ेगा।
-हुकुम अग्रवाल, उद्यमी
बजट से मध्यवर्गीय किसानों को भी बड़ी राहत मिलेगी। किसानों की आय में वृद्धि के लिए बात कही गई है, जिस पर जल्द अमल भी होना चाहिए।
-धर्मेंद्र तिवारी, किसान
आम बजट ने नौकरी पेशा और मध्यमवर्ग के लोगों को बड़ी राहत दी है। टैक्स स्लैब में पांच लाख रुपये तक वृद्धि करके सरकार ने मनचाही मुराद पूरी कर दी है।
-राकेश चौधरी, नौकरी पेशा
आयकर स्लैब से वेतनभोगियों को विशेष फायदा होगा। टैक्स रेट कम होने से आम जनता पर कर का भार बोझ कम होगा। बजट में जीएसटी के सरलीकरण की जो बात कही गई है, यदि ऐसा होता है तो यह व्यापारियों के लिए बेहतर होगा।
-अनुराग तिवारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट
आयकर स्लैब में जो परिवर्तन हुआ है। इससे वेतनभोगियों को राहत मिलेगी। फिलहाल आयकर के विकल्प को अभी समझना होगा। बजट में किसानों के लिए नई तकनीकी की जो बात कही गई है। इससे अन्नदाताओं को भी फायदा मिलेगा।
-डॉ. अर्चना सिंह, विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र
बजट में रोजगार और गरीबों को सहूलियत देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए था। बजट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे आम लोगों को सहूलियत मिल सके।
-ममता अग्निहोत्री गृहणी
बजट में इनकम टैक्स को लेकर सहूलियत, शिक्षा को बढ़ावा, युवाओं के लिए विशेष प्रावधान किया गया है, जिससे काफी उम्मीद हैं। बशर्ते बजट में तो प्रावधान है यदि इसका सही तरीके से क्रियान्वयन हो तो देश को काफी फायदा होगा।
-सानिया जमाल, शोध छात्रा गोला
नए बजट में किसानों के हाथ खाली हैं। किसानों के बारे में बिना सोचे विचार करके बजट पास किया गया है। कृषि प्रधान देश होने के बावजूद किसानों को सरकार ने कुछ नहीं दिया है।
-श्री प्रकाश शुक्ला, निघासन
पूरा बजट हवाहवाई है, पिछले वर्ष भी बजट में वायदे और दावे किए गए थे लेकिन जो योजनाएं दिखाई गईं थीं वह धरती पर अमल में नहीं आई। इस बार भी कुछ ऐसा ही बजट पेश किया गया है।
-पिंटू चौधरी, पलियाकला
विपक्ष ने बजट को पूरी तरह नकारा, सत्ता पक्ष ने कहा-मील का पत्थर
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से शनिवार को संसद में पेश किए गए आम बजट को विपक्षी दलों ने सिरे से नकार दिया। सपा, बसपा और कांग्रेस नेताओं ने बजट को निराशाजनक बताया।
बजट कुछ पूजीपंतियों को छोड़कर देश की 130 करोड़ जनता को मायूस करने वाला है। औपचारिक बजट ज्यादा लगता है। इसमें नौजवान, किसानों, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का ध्यान नहीं रखा गया। कुल मिलाकर बजट निराशाजनक है।
-विनीत गौतम, जिलाध्यक्ष, बसपा
वित्त मंत्री अगले पांच साल की प्लानिंग लेकर चलने की बात कह रही हैं। जबकि देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार नर्वस है। शायद इसलिए ही वितमंत्री पूरा बजट तक नहीं पढ़ सकीं।
-शशांक यादव, एमएलसी, सपा
बजट घोर निराशाजनक है। इसमें न तो किसानों के लिए कुछ है और न ही आम जनता के लिए। लोगों को विश्वास था कि बजट में उसे कुछ हासिल होगा, लेकिन इस बजट से आम जनता को कोई राहत नहीं मिलने वाली है।
-प्रहलाद पटेल, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
बजट देश के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी औरकिसान, नौजवान सहित समाज का हर वर्ग इससे लाभांवित होगा।
-सुनील सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा