ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियाें का नहीं हो रहा संचालन
सफाई-दवा के छिड़काव को ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष मिलते हैं 10-10 हजार
कई सालों से 79.28 लाख रुपये ग्राम पंचायतों के खातों में जमा
गांवों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और दवाओं के छिड़काव कराने को लेकर गठित ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियां कई सालों से निष्क्रिय पड़ी हैं, जिससे गांवों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों से सबसे ज्यादा बुखार समेत कई संक्रामक बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं, जिनसे अब तक 20 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के मामले से सबक लेते हुए कुछ दिन पहले मुख्य सचिव राजीव कुमार ने गांवों में वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए 30 अगस्त तक विशेष सफाई अभियान चलाकर दवाओं का छिड़काव कराने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक गांवों में इसका असर नहीं दिखा है। जबकि स्वास्थ्य समितियों के बैंक खाते में 79.28 लाख की धनराशि जमा है।
जनपद में कुल 1167 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन अभी 995 ग्राम पंचायतों में ही ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियों का गठन है। प्रधान और एएनएम के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक में खाता खोला गया है, जिसमें प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से 10 हजार रुपये का फंड मिलता है। इस फंड से गांवों में स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ ही मच्छरों की रोकथाम के लिए दवाओं का छिड़काव कराए जाने का प्राविधान है। सूत्र बताते हैं कि पिछले चार सालों से ग्राम पंचायतों में यह समितियां कार्य नहीं कर रही हैं, जिससे काफी बजट बैंक खातों में जमा रहकर ब्याज बढ़ा है। इसके चलते वर्ष 2016-17 में ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समितियों में पैसा नहीं भेजा गया, क्योंकि पिछले वर्षों का 79 लाख 28 हजार रुपये जमा है। इसके बाद वर्ष 2017-18 में फंड नहीं दिया गया, क्योंकि अभी भी खातों में 79.28 लाख जमा हैं। नोडल चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया, तो पंचायत राज विभाग भी अपनी जिम्मेदारी से बचता रहा है। हालात इस कदर खराब हैं कि ग्राम प्रधान अपनी जिम्मेदारी लेने से बचते हुए एएनएम के मत्थे आरोप लगा रहे हैं, कि एएनएम द्वारा ही न कार्ययोजना बनाई जा रही है और न ही सहयोग किया जा रहा है।
172 ग्राम पंचायतों में नहीं खुले खाते
वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में 172 नई ग्राम पंचायतें वजूद में आई थीं, जिनमें अभी तक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियों का गठन नहीं हुआ है। इससे इनका खाता भी नहीं खुल सका है, जिससे अभी तक इन्हें फंड नहीं मिल सका।
एईएस/जेई प्रभावित जिलों में खीरी भी शामिल
प्रदेश में सबसे ज्यादा एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम और जापानी इंसेफ्लाइटिस से प्रभावित 13 जिलों में लखीमपुर खीरी भी शामिल है। इस लिहाज से संवेदनशील गांवों में नियमित तौर पर मच्छरों की रोकथाम के लिए दवाओं का छिड़काव कराया जाना जरूरी है। हाल में ही पसगवां स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में बुखार से पीड़ित छात्रा की मौत हो चुकी है और कई छात्राओं का इलाज कराया जा रहा है।
बांकेगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 के प्रधान वीरेंद्र कुमार भार्गव ने बताया कि दो साल से खाता संचालन के लिए सीएचसी जाकर एएनएम से मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक एएनएम द्वारा खाता संचालन के लिए आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई है। इससे अभी तक एक भी कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी। कमोवेश यही हालात जिले की सभी 1167 ग्राम पंचायतों का है।
मामला संज्ञान में है। ग्राम पंचायतों में गठित स्वास्थ्य समितियाें के संचालन की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से ग्राम प्रधान और एएनएम की है। इस संबंध में नोडल विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
सीएमओ को इसकी जानकारी ही नहीं
हमारे सामने कभी इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है और न ही एएनएम द्वारा कोई रिकार्ड प्रस्तुत किया गया है। अब मामले को देखवाएंगे।
डॉ. जावेद अहमद, सीएमओ