लखीमपुर खीरी। सर्दी के साथ सांस लेने में परेशानी की समस्या भी बढ़ी है। बुजुर्ग और बच्चों में यह दिक्कत अधिक हो रही है। मौसम में अचानक हुए बदलाव से एक सप्ताह में छह लोगों की मौत हो चुकी है। चिकित्सक इन मौतों की वजह निमोनिया होना बता रहे हैं।
दिन में तेज धूप और सुबह-शाम तापमान में गिरावट से जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। मौजूदा समय में ज्यादातर मरीजों को सर्दी, जुकाम-बुखार और सांस संबंधी बीमारियाें ने घेर रखा है। पिछले करीब एक सप्ताह में जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती पांच बच्चों की जान जा चुकी है। एक वृद्ध ने सांस संबंधी बीमारी के कारण दम तोड़ दिया।
इनकी गई जान
18 दिसबंर को जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में सीतापुर जिले के थाना लहरपुर के ग्राम सलारपुर निवासी 50 वर्षीय मुस्लिम पुत्र गुरु की मौत हो गई।
19 दिसंबर को बंगलहा कुटिया निवासी दिनेश कुमार अपनी सात साल की बेटी रानी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर ने प्री-निमोनिया के लक्षण पाए। एक घंटे तक चले इलाज के बाद बच्ची ने दम तोड़ दिया।
21 दिसंबर को दो बच्चों को भर्ती कराया गया था। चार महीने के मुकेश व तीन महीने की अदीबा को सांस लेने में परेशानी की बात सामने आई थी। इलाज के दौरान दोनों बच्चों की माैत हो गई।
23 दिसंबर को को भी दो बच्चों को मौत हो गई। ढाई माह के जितिन व तीन महीने के आरव को भी निमोनिया और सीने में जकड़न की शिकायत थी। इलाज के दौरान इन दोनों की मौत हो गई।
चार बच्चों की उम्र एक साल से भी कम
बता दें कि दो दिनों में चार बच्चों की मौत हो गई। सभी बच्चे एक वर्ष से कम उम्र के थे चिकित्सकों की सलाह है कि मौजूदा समय की सर्दी में सबसे ज्यादा बच्चों को बचाने की आवश्यकता है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आरपी वर्मा का कहना है कि बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं रखें। उनके शरीर की गर्मी कम न होने दें। इसके अलावा सिर और पंजों को भी ढंककर रखें।
निमोनिया के लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
बच्चें में खांसी आना, लगातार बुखार बना रहना, पसीना आना और ठंड लगना, सांस लेने में तकलीफ होना, तीव्र व उथली श्वांस, सीने में तेज या चुभने वाला दर्द, भूख में कमी।
निमोनिया से बचाव
बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं। सुबह शाम घर से बाहर टहलाने के लिए न निकालें। खुली जगह पर बच्चे की मालिश करने से बचें। किसी तरह की कोई दिक्कत होने पर चिकित्सक की सलाह लें। बिना चिकित्सीय सलाह के कोई भी दवा बच्चे काे देने से बचें।