आखिरकार महिला डॉक्टर की कमी बिजुआ सीएचसी में एक प्रसूता को खल गई। कहने को तो यह सीएचसी है लेकिन यहां पर लेडी डॉक्टर न होने से आए दिन जच्चा-बच्चा की जान पर बन आती है।
सोमवार को भी यही हुआ। गुलरिया निवासी आमीन की पत्नी नसीमुन निशा को अपने पहले बच्चे के जन्म के लिए बिजुआ सीएचसी लाया गया था। शाम को चार बजे सब कुछ सामान्य था, लेकिन रात में प्रसूता की हालत बिगड़ गई और उसे रेफर करना पड़ा। घरवाले उसे भीरा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल लेकर गए जहां प्रसूता ने बच्ची को जन्म दिया लेकिन अगले ही दिन बच्ची की मौत हो गई।
निजी इलाज में 13000 खर्च
आमीन की माने तो उसकी पत्नी को जब सीएचसी ले गए तब सब कुछ सामान्य था, लेकिन यहां पर कोई भी महिला डॉक्टर न होने से उनकी पत्नी को रेफर कर दिया गया। यहां पर स्टाफ नर्स ने बताया कि एक घंटे में ही प्रसूता को महिला डॉक्टर के पास लेकर जाओ। समय पर 108 एंबुलेंस न मिलने और कम समय होने से उसे वह भीरा के प्राइवेट अस्पताल लेकर गए। यहां पर उनकी पत्नी का प्रसव कराया गया जबकि बच्ची की हालत खराब होने से डॉक्टर ने जवाब दे दिया। अस्पताल से घर लाने के कुछ देर बाद ही शिशु की मौत हो गई।
प्रभारी सीएचसी बिजुआ डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि महिला को उन्होंने खुद देखा था, यहां पर महिला और विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से रिस्क नहीं लिया जा सकता था इसलिए रेफर किया गया था। बच्चे की मौत के बारे में नहीं पता है।