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पहले कोरोना और अब बर्ड फ्लू ने तोड़ी चिकन कारोबारियों की कमर

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ममरी में एक दुकान पर बिक्री को रखे मुर्गा-मुर्गी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। कोरोना काल में तीन माह की बंदी से हर कोरोबार प्रभावित रहा। इसके बाद अनलॉक हुआ, लेकिन तीन माह की बंदी के कारण आर्थिक तंगी से बेहाल लोगों के सामने दाल रोटी की जुगत करने के लिए ही काफी मशक्कत करनी पड़ी। ऐसे में कम बिक्री के कारण मीट, मुर्गा व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित रहा। धीरे धीरे जिंदगी पटरी पर आने लगी तो चिकन, अंडा बेचने वालों की रोजी रोटी को भी गति मिली। मगर, अब बर्ड फ्लू ने चिकन एवं अंडा कारोबार को एक बार फिर खतरे में डाल दिया है। ऐसे में इस व्यवसाय से जुड़े लोग काफी परेशान हैं।
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बर्ड फ्लू को लेकर शासन की ओर से हाई अलर्ट है। पशु चिकित्सकों ने मुर्गी पालन केंद्र का निरीक्षण करना शुरू कर दिया है। केंद्र संचालकों को एहतियात बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है तो चूना, ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव करवाया जा रहा है। भले ही जिले में अब तक सबकुछ ठीक है लेकिन बर्ड फ्लू के भय का असर चिकन, अंडा कारोबार पर दिखने लगा है। मुर्गी पालन करने वालों का कहना है कि आठ दिन से चूजे नहीं मिल पा रहे। जो चूजे तैयार हैं उनके खरीदार नहीं मिल रहे। उधर, चिकन बिक्री भी प्रभावित होने लगी है। एक मुर्गी पालन केंद्र के संचालक अज्जू का कहना है कि कोरोना काल में तीन माह की बंदी में लाखों का नुकसान हुआ। उम्मीद जगी थी कि अब कारोबार को अच्छी गति मिलेगी, लेकिन बर्ड फ्लू की दहशत ने फिर से धंधा मंदा कर दिया है। खौफ के कारण मुर्गों की बिक्री प्रभावित होने लगी है।
लोगों ने कम किया अंडा और चिकन खाना
बर्ड फ्लू की दहशत में शौकीनों ने मुर्गा ही नहीं अंडा भी खाना कम कर दिया है। इससे दोनो की खपत और मूल्य में भी कमी आई है। एक अंडा स्टोर मालिक ने बताया कि पहले रोजाना 300 कैरेट ( एक में 30 अंडा) बिक जाती थीं, लेकिन अब 150 कैरेट ही बमुश्किल बिक पा रही हैं। वहीं चिकन भी 70 से 75 रुपये प्रति किलो बिक रहा है जबकि 30 से 35 रुपये में मिलने वाले चूजे को तैयार करने में 80 से 90 रुपये का खर्च आता है।
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कोरोना के कारण चिकन कारोबार प्रभावित हुआ था। हालांकि अब कारोबार को कुछ गति मिली, लेकिन बर्ड फ्लू के कारण अब फिर लोग खौफ में आ गए हैं। इससे धंधा फिर से मंदा हो गया है। -सलमान, चिकन विक्रेता हैदराबाद
आम दिनों में अंडों की करीब 300 कैरेट बिक जाती थीं, लेकिन जब से बर्ड फ्लू की दहशत फैली है तब से अंडा बिक्री आधे से भी कम रह गई है। अब मात्र 100 से 125 कैरेट ही बिक पा रहीं हैं। -निजामुद्दीन, रियाज अंडा केंद्र
कीमत गिरने के साथ चिकन की मांग में भी कमी आई है। पहले से करीब 25 प्रतिशत मांग घटी है। पहले जिंदा मुर्गा 100 से 125 रुपये प्रति किलो बिकता था, लेकिन अब 70 से 75 रुपये में बिक रहा है। -हारून मुर्गी पालन केंद्र
बर्ड फ्लू से डरने की जरूरत नहीं है। बस एहतियात बरतें। यदि किसी जगह पर एक साथ ज्यादा संख्या में पक्षी मृत मिलें तो इसकी सूचना नजदीकी पशु अस्पताल में दें, जिससे जांच के लिए सैंपल भेजवाए जा सकें। मृत पक्षियों को सीधे न छूकर किसी दस्ताने आदि से जमीन में दफन कर दें। जहां पर प्रवासी पक्षियों का आना जाना हो वहां जाने से बचें और नंगे पैर बिल्कुल न जाएं।
-डॉ.टीके तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
बर्ड फ्लू को लेकर दुधवा प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता
बांकेगंज। देश के कई हिस्सों में लगातार फैल रहे बर्ड फ्लू को लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन खासा चौकन्ना नजर आ रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने सभी फील्ड स्टॉफ को पूरी तरह सतर्क रहकर पक्षियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। यह भी कहा गया है कि यदि किसी पक्षी में इस तरह के कोई लक्षण पाए जाएं तो उसे अन्य पक्षियों से अलग कर जांच कराई जाए।
दुधवा टाइगर रिजर्व समेत खीरी जिले में बड़ी संख्या में झीलें, नदियां, बैराज और छोटे वेटलैंड हैं। यहां पर पूरे साल स्थानीय परिंदों का बसेरा रहता है। सर्दियों के मौसम में दुधवा के भादीताल, ककरहा, किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल आदि में बड़ी संख्या में प्रवासी परिंदे ठंडे देशों यहां आकर चार महीने प्रवास करते हैं। यह परिंदे झीलों और जंगलों के ऊंचे पेड़ों में अपने घोंसले बनाते हैं। इस दौरान वे प्रजनन करते हैं और जब उनके चूजे उड़ने लगते हैं तो मार्च के अंत में परिवार समेत अपने वतन लौट जाते हैं। इन पक्षियों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग उठाता है। अब जब बर्ड फ्लू तेजी से फैल रहा है ऐसे में वन विभाग की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। वन विभाग की टीमें वेटलैंड पर तैनात की गई हैं, जो बारी-बारी से पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। साथ ही यह भी कोशिश की जा रही है कि जंगल से सटे गांवों की पालतू मुर्गा-मुर्गियां इन प्रवासी परिंदों के संपर्क में न आने पाएं। क्योंकि यह संक्रमण एक से दूसरे पक्षी में तेजी से फैलता है। वन विभाग के अफसर भी लगातार वेटलैंड्स का भ्रमण कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वेटलैंड के आसपास रहने वाले लोगों को भी बर्ड फ्लू के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही यह भी हिदायत दी जा रही है कि पालतू मुर्गा-मुर्गी जलाशयों की ओर न जाएं। ग्रामीणों को यह भी बताया जा रहा है कि पालतू-मुर्गा-मुर्गी की आकस्मिक मौत होने पर इसकी सूचना तत्काल निकटवर्ती पशु चिकित्सालय को दें। जिससे संक्रमण फैलने से रोका जा सके। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि अब तक जिले में बर्ड फ्लू का कोई भी केस सामने नहीं आया है। बावजूद इसके पक्षियों की पूरी तरह निगरानी और देखभाल की जा रही है। संवाद
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