जी हां, एक तरफ चुनाव का शोर है, लेकिन बसलीपुर ग्रंट पंचायत एक ठंडे हवा के झोंके सा है। इस ग्राम पंचायत ने इस बार भी एक मिसाल प्रस्तुत की है। ब्लाक बिजुआ में मंगलवार को होने वाले मतदान में सिर्फ यही एक गांव ऐसा है, जहां के मतदाता अपना प्रधान और पंचायत सदस्य पहले ही चुन चुके हैं। गांव की निर्मलजीत कौर का प्रधान चुना जाना तय हो गया है, क्योंकि उनके विरोध में कोई प्रत्याशी सामने नहीं आया है। निर्मलजीत कौर राज्य स्तरीय शूटर भी हैं। वहीं पति प्रीतइंटर सिंह पहले ही निर्विरोध बीडीसी सदस्य चुने जा चुके हैं।
बसलीपुर ग्रंट के लिए ये कोई नई बात नही है। करीब ढाई दशक से ज्यादा समय से इस गांव में ऐसे कम ही मौके आए हैं जब गांव में चुनाव हुए हों। मौजूदा ब्लाक प्रमुख प्रीतइंदर सिंह सन1989 में पहली बार निर्विरोध प्रधान चुने गए थे। अगली बार 1995 में सीट रिजर्व होने पर चुनाव तो हुआ लेकिन प्रीतइंदर सिंह फिर से निर्विरोध सदस्य और निर्विरोध उपप्रधान बने। इसके बाद सन 2000 और 2005 में गांव वालों ने एक बार फिर प्रीतइंदर सिंह निर्विरोध प्रधान चुना। वहीं उनकी पत्नी 2005 में निर्विरोध बीडीसी सदस्य चुनीं गईं।
अगली बार सन 2010 में प्रधान पद के चुनाव तो हुए पर निर्मलजीत कौर ही विजयी रहीं। जबकि उनके पति प्रीतइंदर सिंह निर्विरोध बीडीसी सदस्य चुने गए। बाद में ब्लाक प्रमुख बने। 2015 के पंचायत चुनाव में गांव वालों ने निवर्तमान ब्लाक प्रमुख प्रीतइंदर को एक बार फिर निर्विरोध बीडीसी सदस्य और उनकी पत्नी को निर्विरोध प्रधान चुना।
ये है ग्राम पंचायत की एकराय से चुनी गई टीम
प्रधान- निर्मलजीत कौर, बीडीसी सदस्य-प्रीतइंदर सिंह और ग्राम पंचायत सदस्य अलमुन निशा, बलविंदर कौर, शिवप्यारा देवी, ऊषादेवी, लीला देवी, कोकिला, रामनिवास, दुर्गा, रजीउल्ला, लीलाराम, श्रवण सिंह, महादेव सरकार, माखन, तारक ढाली, अनिल सरकार।
चार मजरों में बंगाली वोटर है सबसे ज्यादा
इस गांव ने कभी जाति या धर्म को देखकर अपना प्रधान और सदस्य नही चुना। चार मजरों में 3200 वोटर में सबसे ज्यादा बंगाली और दूसरे नंबर पर सिख वोटर हैं, इसके अलावा मुस्लिम और दलित वर्ग के लोग भी हैं। फिर भी यहां के लोग अपने गांव के विकास के लिए एक राय कर एक परिवार पर भरोसा जताते आ रहे हैं।