मान्यता : सर्प कुंड में स्नान करने से सांपों के डसने का नहीं रहता भय
मंदिर के पुजारी बाबा सुमेर गिरि ने बताया कि नागपंचमी के दिन यहां लगभग 65 वर्षों से मेला लगता आ रहा है। बाबा देवेश्वर नाथ मंदिर के पास ही सर्प कुंड बना हुआ है। इस कुंड में स्नान करने से व्यक्ति को एक वर्ष सांप काटने का भय नहीं रहता। कुंड की मिट्टी घर में रखने से घरों में सांपों के आने का भी भय नहीं रहता है। विशेष कर यहां नाग पंचमी के दिन मेला लगता है। मेले में आए श्रद्धालु कुंड में स्नान करने के साथ मिट्टी घर ले जाते हैं।
12 प्रकार के होते हैं कालसर्प योग दोष
आचार्य प्रमोद दीक्षित ने बताया कि कालसर्प योग दोष मुख्यतः 12 प्रकार के होते हैं। इसके विभिन्न रूपों को जोड़कर आंशिक कालसर्प योग दोष 3456 प्रकार का बनता है। जातक के जन्म के समय में राहु एवं केतु के मध्य में जब सभी ग्रह स्थित होते हैं, ज्योतिष में उसको कालसर्प योग दोष कहते हैं।
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कालसर्प योग दोष होने के कारण शेष सात ग्रह स्वतंत्र रूप से अपना कार्य नहीं कर पाते हैं। कालसर्प योग दोष शांति के लिए गोदावरी नदी एवं त्रयंम्बकेश्वर (ज्योतिर्लिंग) महादेव का सानिध्य होना अनिवार्य हैं। जिन लोगों को कालसर्प योग का दोष होता है इस दोष को दूर करने के लिए नागपंचमी के दिन देवकली में आकर नाग देवता की पूजा करने से दोष मुक्त हो जाते हैं।
नेपाली बाबा ने देवकली में स्थापित किए थे 12 ज्योतिर्लिंग
देवकली तीर्थ स्थल का सर्पों पर विशेष उपकार है। सन् 1994 में नेपाल से आए सदगुरुदेव भगवान (भवानी प्रसाद उपाध्याय) नेपाली बाबा के नाम से प्रसिद्ध गुरू ने कुंभी से आच्छादित देवतीर्थ को साफ कराया एवं गोदावरी नदी के जल सहित गंगा आदि नदियों से जल लाकर तीर्थ को प्रतिष्ठित किया था। भगवान त्रयंम्बकेश्वर (ज्योतिर्लिंग) सहित द्वादश ज्योतिर्लिंगों को प्रतिष्ठित किया है। इसलिए कालसर्प योग शांति के लिए देवकली तीर्थ स्थल का विशेष महत्व है।