हालांकि किसान नेता पवन पाठक, कुछ संतों और स्थानीय लोगों ने इस व्यवस्था का विरोध किया है। उनका कहना है कि वैकल्पिक कुंड में स्नान और जल भरना धार्मिक परंपरा का विकल्प नहीं हो सकता। श्रद्धालुओं का कहना है कि नदी स्नान का अपना पौराणिक और धार्मिक महत्व है, इसलिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम कर सीमित और सुरक्षित स्थान से स्नान एवं जल भरने की अनुमति दी जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने विधायक से जताई नाराजगी
धौरहरा विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और किसान नेता से वार्ता कर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें समझाने का प्रयास किया। इस दौरान लोगों ने अपनी नाराजगी भी जताई। विधायक ने भरोसा दिलाया कि जहां नदी की स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित होगी, वहां प्रशासन से बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा प्रबंध कराकर स्नान एवं जल भरने की अनुमति दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि जालिमनगर में स्थायी पक्का घाट बनवाने के लिए मुख्यमंत्री को पुनः पत्र भेजा गया है।
सुरक्षा को लेकर प्रशासन भी सतर्क
एसडीएम राशि कृष्णा का कहना है कि पिछले वर्षों में डूबने की घटनाओं और इस वर्ष तेज भू-कटान के कारण नदी का स्वरूप काफी खतरनाक हो गया है। कई अस्थायी घाट नदी में समा चुके हैं और गहराई भी बढ़ गई है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नदी से पाइप लाइन बिछाकर स्नान करागा प्रशासन
कावड़ियों के स्नान और जल भरने को बनाएं गए कुंड का विरोध की सूचना पर एडीएम और अपर पुलिस अधीक्षक पवन गौतम मौके पर पहुंचे और लोगों से वार्ता करने के बाद तहसीलदार आदित्य विशाल और एसडीएम राशि कृष्णा, ईओ नगर पंचायत धौरहरा गौरव सिंह ने निर्देश दिया कि महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग अलग स्नान गृह बनाएं। नदी का जल पाइप लाइन बिछा कर टोटियों से कांवड़ियों को उपलब्ध कराए। प्रशासन ने टोटियां लगाने का काम शुरू कर दिया है।