बैंकों की हठधर्मिता के कारण जिले में संचालित सरकारी योजनाओं पर
बुरा असर पड़ रहा है। खासकर मत्स्य पालन के लिए ऋण उपलब्ध कराने और लोहिया
तथा इंदिरा आवासों का धन लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर करने में बैंकों की
ओर से अड़चनें पैदा की जा रही हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता
है कि मत्स्य विभाग के 45 स्वीकृत फाइलों में सिर्फ चार मत्स्य पालकों को
ही ऋण दिया गया है, 41 फाइलें बैंकों में धूल फांक रही हैं।
सहायक
निदेशक मत्स्य अनिल गुप्ता के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में सितंबर तक 45
मत्स्य पालकों की सूची तैयार कर ऋण दिलाने के लिए विभाग से स्वीकृत दी गई
थी। इन सभी फाइलों को संबंधित बैंकों में भेज दिया गया था, लेकिन कई महीने
गुजरने के बाद भी बैंकों का रुख अड़ियल बना हुआ है। मत्स्य पालकों को
बैंकों से ऋण न मिलने के कारण सरकार की योजनाएं बाधित हो रही हैं।
इस बाबत
कई बार बैंक अधिकारियों के साथ बैठक में सहायक निदेशक ने सरकार की योजनाओं
के लंबित होने का हवाला देते हुए मत्स्य पालकों को ऋण उपलब्ध कराने की
अपील की, लेकिन फिर भी बैंक ऋण देने में आनाकानी कर रही हैं। मत्स्य के बाद
सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं लोहिया आवास योजना और इंदिरा आवासों के
लिए भी लाभार्थी के खातों में धन ट्रांसफर करने में बैंकों की हीलाहवाली
जारी है। बांकेगंज ब्लाक के कुकरा के एक बैंक में इंदिरा आवास के 100
लाभार्थियों का बजट भेजा गया है, लेकिन यहां हर लाभार्थी की पहली किस्त का
पैसा उसके खाते में ट्रांसफर करने में बैंक वाले आनाकानी कर रहे हैं।
बांकेगंज के बीडीओ भूषण कुमार का कहना है कि संबंधित पंचायत सेक्रेटरी से
उन्हें इस बाबत शिकायत भी मिली है। वहीं हसनपुर कटौली, निघासन समेत कई
क्षेत्रों में बैंकों की मनमानी करने पर अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा
है। इस बाबत परियोजना निदेशक डॉ. दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि कई बार
अधिकारियों से बात कर धन लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर कराना पड़ता है।
पीडी ने भी बैंकों के रवैये पर हैरानी जताई है।