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कई खातों की लिमिट बढ़ाकर निकाले गए रुपए

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गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। भारतीय स्टेट बैंक गोला शाखा में खातों की लिमिट बढ़ाकर करोड़ों के गबन का खुलासा होने के बाद अब कई और परतें खुलने लगी हैं। आठ अन्य खातों से भी इसी तरह रकम के गोलमाल का मामला सामने आया है। इस बात की आशंका बढ़ गई है कि अगर ठीक ढंग से जांच हुई तो गबन की राशि कई करोड़ में पहुंचेगी। आठ खातेदारों ने गबन का आरोप लगाते हुए अपने खातों की जांच और कार्रवाई के लिए पुलिस को तहरीर दी है।
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करोड़ों के गबन का खुलासा होने और बैंक प्रबंधन के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और फील्ड अफसर को सस्पेंड करने के साथ फील्ड अफसर पर रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद अन्य खातेदारों में भी हड़कंप है। इसी के चलते आठ खातेदारों ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी है। जिसमें आरोप है कि ऋण खाताधारकों के खाते से बिना जानकारी के बैंक ने करोड़ों रुपये निकाल लिए हैं। बैंक ऑडिट के दौरान जब खाता धारकों को बैंक में बुलाया गया तो उन्हें जानकारी हुई कि उनके खातों से रुपये निकल चुके हैं, जिसकी शिकायत उन्होंने बैंक अधिकारियों से भी की है। खाताधारक आनंद कुमार वर्मा ने एक करोड़ 34 लाख, अनुज वर्मा ने 25 लाख, नरेशचंद्र जायसवाल ने 10 लाख, योगेश कुमार ने 25 लाख, आशीष पटेल ने 26 लाख, मलखान सिंह ने 14 लाख, अतिकुल रहमान ने 34 लाख, राकेश कुमार ने 32 लाख रुपये खाते से निकाले जाने का आरोप लगाया है।
नवनियुक्त बैंक मैनेजर गोपाल दत्त सिंह ने बताया कि फील्ड अफसर संजीव यादव ने आनंद कुमार वर्मा के खाते की जून 2018 से 31 दिसंबर 2019 तक बिना उच्चाधिकारियों की स्वीकृति 17 लाख की लिमिट को सिस्टम में 12 विभिन्न तिथियों में 92लाख 50 हजार बढ़ा दिया और बढ़ी धनराशि 92 लाख 17 हजार 829 रुपये निकाल लिए। ऑडिट से पता चला कि एक अन्य खाता संख्या जो कि विवेक प्रकाश शुक्ल के नाम से है। उसकी लिमिट 13 लाख 50 हजार को बढ़ाकर एक करोड़ नौ लाख 78हजार 970 रुपये निकाले गए। दोनों खातों को जोड़कर दो करोड़ से अधिक का गबन कर लिया गया।
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जांच में कई और की फंस सकती है गर्दन
बैंक सूत्रों का कहना है कि जांच जारी है, परत दर परत खुल रहीं हैं, कई और कर्मचारियों की गर्दन फंसने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
भागने की फिराक में था फील्ड अफसर
काफी समय से चल रही जांच में फील्ड अफसर संजीव यादव को आभास हो गया था कि उसकी गर्दन फंस रही है। वह परिवार सहित पंजाबी कॉलोनी में किराये के मकान में रहता था। बुधवार की रात 10 बजे वह अपना सामान ट्रक में भरवा रहा था तभी लोगों को भनक लगी। लोगों ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने फील्ड अफसर को हिरासत में ले लिया।
अमर उजाला ने पहले ही किया था आगाह
जनवरी के दूसरे सप्ताह से सीतापुर के बैंक अफसरों और आरबीआई की टीम की जांच पड़ताल शुरू होने पर अमर उजाला ने 22 जनवरी के अंक में इस खबर को प्रमुखता से छापा था, तबसे तमाम खातेदार बैंक में अपने खातों की जानकारी के लिए पहुंचने लगे।
फील्ड आफीसर की पत्नी बोली-अकेले नहीं किया है गुनाह
फील्ड अफसर संजीव यादव की पत्नी रुचि यादव ने कोतवाली में मीडिया को बताया कि पूरे मामले में केवल उनका पति ही जिम्मेदार नहीं है और भी अधिकारी-कर्मचारी इस मामले में लिप्त हैं, लेकिन अपने को बचाने के प्रयास में बैंक अधिकारियों ने उनके पति को ही दोषी ठहरा दिया है।
भनक लगते ही प्रबंधक फरार
बुधवार की रात पंजाबी कॉलोनी में फील्ड आफीसर के साथ बातचीत करते समय उमेश पांडे को भनक लग गई कि निलंबन के बाद उनकी भी गिरफ्तारी हो सकती है, इसलिए वह मौका पाकर रात में ही फरार हो गए, तबसे उनका मोबाइल स्विच ऑफ है।
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