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अब बैलहा में हुआ बाढ़ राहत घोटाले का खुलासा

Tue, 08 Sep 2015 07:44 PM IST
निघासन
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तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत लालपुर में बाढ़ राहत के चेकों को फर्जी ढंग से भुना कर बाढ़ पीड़ितों का पैसा हड़पने के मामले का खुलासा होने के बाद इसी तहसील क्षेत्र के बैलहा गांव में बाढ़ राहत की धनराशि में बड़े पैमाने पर घपलेबाजी उजागर हुई है। शिकायत होने पर नायब तहसीलदार ने मामले की जांच की। जांच में लेखपाल की लापरवाही उजागर हुई है। नायब तहसीलदार रामनरायन ने जांच रिपोर्ट तहसीलदार को सौंपी हैं। यहां भी मृतकों और शिक्षकों के नाम से बनीं एकाउंटपेयी चेकों का भुगतान बैंक से फर्जी खाता खुलवाकर करा लिया गया है।
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लालपुर ग्राम पंचायत में बाढ़ राहत चेकों का घोटाला करने वाले रिटायर्ड तहसीलदार रामऔतार और लेखपाल छत्रपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। गिरफ्तारी तो दूर लेखपाल पर अब तक कोई विभागीय कार्रवाई भी नहीं हो पाई है। इधर, लालपुर से सटी ग्राम पंचायत बैलहा में भी बड़े पैमाने पर बाढ़ राहत चेकों का घोटाला सामने आया है।  वर्ष 2013 में बाढ़ से तबाह हुए लोगों को सहायता देने के लिए चेक जारी की गई थीं। इसी क्रम में रामेश्वर, वीरेंद्र, सागर की चेक संख्या 466626, 466627, 466628 पर  4956 की चेक बनाई गईं। गांव के ही हरवंश का आरोप है कि इन लोगों की मौत हो गई है और वे वर्षों पहले बाहर अलग अलग स्थानों पर रहे रहे थे। इनके नाम की एकाउंटपेयी चेक इन लोगों के परिवार वालों को न देकर दलालों को दे दी गईं। शंभू पेशे से अध्यापक हैं वह बाहर रह रहे हैं। उनके भी 3792 रुपये के चेक का भुगतान अंगूठा लगाकर करा लिया गया। बाबा कल्याण दास की मौत वर्षों पहले हो गई थी। उनके नाम की चेक भी बन गई। गांव के ही हरवंश ने जब इसकी शिकायत की तो नायब तहसीलदार ने जांच की। इस संबंध में उन्होंने अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंप दी है।
नायब तहसीलदार रामनरायन ने बताया कि जांच में लेेखपाल को घोटाले का दोषी पाया गया है। मृतकों और अन्य लोगों के नाम से एकाउंटपेयी चेकों का भुगतान फर्जी खाते खुलवाकर किया गया है। मामले की जांच रिपोर्ट तहसीलदार को सौंप दी गई है।
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जांच से क्यों कतरा रहा है राजस्व विभाग!
लालपुर के लेखपाल के खिलाफ आरोप सिद्ध होने के बाद रिपोर्ट दर्ज कर ली गई, लेकिन विभागीय कार्रवाई शून्य रही। यही हाल बैलहा ग्राम पंचायत का है, यहां भी नायब तहसीलदार की जांच में हल्का  लेखपाल को दोषी पाया गया है। इसके बावजूद विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। यदि बारीकी से जांच की जाए तो लेखपाल, दलाल, प्रधान के साथ में बैंक और राजस्व विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी भी दोषी मिलेंगे। अपनों की गर्दन बचाने के कारण विभाग कोई भी कार्रवाई करने से कतरा रहा है।
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