बाढ़ के दौरान गांवों से गायब रहना सफाईकर्मियों को भारी पड़ सकता है। इनदिनों सफाईकर्मी पूरी तरह प्रशासन के रडार पर हैं। खासकर तब जब उनसे संपर्क करने पर मोबाइल स्विच ऑफ हो या नॉट रिचेबल बता रहा हो। ऐसी स्थिति आने पर सफाईकर्मियों की लापरवाही मानी जाएगी और उन पर कार्रवाई भी होगी।
जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों में परेशानियों से घिरे लोगों की अधिक से अधिक मदद की जा सके इसके लिए सफाईकर्मियों को गांवों में मौजूद रहकर ब्लीचिंग पाउडर कर छिड़काव करने आदि कार्य सौंपा गया है। डीएम किंजल सिंह ने जिला पंचायतराज अधिकारी योगेंद्र कटियार को निर्देश दिया है कि प्रतिदिन सफाईकर्मियों की मॉनीटरिंग की जाए। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 13 जुलाई से मॉनीटरिंग की जा रही है। सफाईकर्मियों का मोबाइल न उठने या नॉट रिचेबल बताने पर गांव के प्रधान, शिक्षक, बीडीसी आदि से लोकेशन ली जा रही है। डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने बताया कि दफ्तर में खुले कंट्रोल रूम से सफाईकर्मियों की लोकेशन ली जा रही है। अब तक 11 सफाईकर्मियों की लापरवाही सामने आ चुकी है। जिसके बाद उनका वेतन रोक दिया गया है और उन्हें नोटिस जारी की गई है। डीपीआरओ ने निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में तैनात सफाईकर्मी प्रतिदिन संबंधित गांवों में पहुंचकर सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखें, ताकि लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो।
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दो और सफाईकर्मियों का वेतन रोका
मॉनीटरिंग के दौरान बिजुआ ब्लॉक के जंगल नंबर नौ में तैनात सफाईकर्मी कैलाश शंकर और कोरियानी गांव में तैनात सफाईकर्मी गौतम का मोबाइल स्विच ऑफ मिला। जिसके बाद डीपीआरओ ने दोनों का वेतन रोकते हुए नोटिस जारी किया है।