लखीमुपर खीरी। आयुष्मान योजना को एक साल पूरा हो गया है। मगर, लाभार्थियों की संख्या के सापेक्ष गोल्डन कार्ड कम ही जारी हुए हैं। इसका कारण आयुष्मान पत्र में पात्रों का नाम और पते का गलत होना है। इनमें सुधार कराने के लिए लाभार्थी जिला अस्पताल से लेकर सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। हालांकि नाम सुधारने के लिए एक फार्मेट तैयार किया है, जिसे जिला अस्पताल के आयुष्मान कैंप से प्राप्त किया जा सकता है।
फूलबेहड़ निवासी रामू को जो पत्र मिला है कि उसमें उनके पिता का नाम बदल गया है। वहीं नकहा के मंगहा निवासी रामजीवन को जो पत्र मिला है उसमें उनके बच्चों के नाम गलत लिखे हैं। ऐसे में उनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। सोमवार को जिला अस्पताल दौड़कर आए। इस पर उन्हें फार्मेट देकर प्रमाणित कराने को कहा। ये सिर्फ एक दो नाम नहीं हैं, ऐसे में तमाम ग्रामीण हैं जिनके आधार कार्ड से आयुष्मान पत्र पर लिखे नाम और पतों में भिन्नता हैं। इसको सुधरवाने के लिए लाभार्थी सीएमओ कार्यालय से जिला अस्पताल के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
इस तरह सुधरवाएं गड़बड़ियां
आयुष्मान लाभार्थियों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से जो पत्र भेजे गए हैं। उनमें और उनके आधार कार्ड में दर्ज नाम एवं पते में भिन्नता है। इसमें सुधार कराने के लिए जिला अस्पताल में एक फार्म मिलेगा। इस पर सही नाम, पिता का नाम एवं फोटो लगाकर आयुष्मान पत्र में दर्ज गलत नाम लिखाकर प्रधान एवं पालिका सदस्य से प्रमाणित कराना होगा। इसके बाद नाम आदि में सुधार हो सकेगा।
यदि लाभार्थी एवं उसके परिवार के सदस्यों के नाम और पता गलत है। तो सुधार के लिए जिला और महिला अस्पताल में आयुष्मान के फार्म उपलब्ध है। इसे भरकर जमा करने के बाद सुधार हो जाएगा।
डॉ. बीसी पंत
एसीएमओ एवं आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी