लखीमपुर खीरी। कारगिल विजय दिवस की वर्षगांठ पर शहर के निकट बसैगा पुर निवासी पूर्व सैनिक अश्वगज सिंह ने 1999 के इस युद्ध में अपनी भूमिका की यादें साझा कीं। उस दौरान वे सेना में टेक्नीशियन के पद पर तैनात थे। उन्होंने कारगिल युद्ध में सेना के लिए गोला-बारूद और अन्य आवश्यक सामग्री को अग्रिम चौकियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
अश्वगज ने बताया कि उनकी पहली पोस्टिंग 1997 में अंबाला में हुई थी। कारगिल युद्ध में उनको भेजा गया था, उस समय उनका जोश चरम पर था। वे बताते हैं कि हम 20-20 गाड़ियों के काफिले में गोला-बारूद और रसद लेकर जाते थे। प्रत्येक गाड़ी में दो से तीन जवान होते थे, जो कठिन परिस्थितियों में दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सामान पहुंचाते थे।
उन्होंने युद्ध के दौरान की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि ठंड, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और दुश्मन की नजरों से बचते हुए यह काम बेहद जोखिम भरा था, लेकिन देश के लिए कर्तव्य की भावना ने उन्हें हर पल प्रेरित किया।
कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने 18,000 फीट की ऊंचाई पर अभूतपूर्व साहस का परिचय देते हुए विजय हासिल की थी। अश्वगज जैसे सैनिकों की मेहनत और समर्पण ने इस जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि हमारा काम था कि सैनिकों तक गोला-बारूद और जरूरी सामान समय पर पहुंचे। यह देखकर गर्व होता था कि हमारे प्रयासों से अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहे जवान दुश्मन का मुकाबला कर रहे हैं।