लखीमपुर खीरी/मितौली। अब तक निजी अस्पतालों द्वारा आशा वर्कर से सांठगांठ करके डिलीवरी केस अपने यहां कराने का खेल तो चल ही रहा था, झोलाछापों ने भी उनका साथ पकड़ लिया है। मितौली क्षेत्र के बड़ागांव तिराहे पर एक झोलाछाप के यहां सोमवार को गोपनीय तरीके से 33 आशा वर्कर की हो रही मीटिंग का भंडाफोड़ हो गया। सीएचसी अधीक्षक ने मौके की वीडियो रिकार्डिंग करके इन सभी आशा वर्कर के निष्कासन की संस्तुति सीएमओ को भेज दी है।
बड़ागांव तिराहे पर अवैध रूप से चल रहे एक झोलाछाप ‘सावित्री क्लीनिक’ नाम से दुकान चला रहा है। झोलाछाप इन आशा वर्करों को लालच देकर सरकारी अस्पतालों में आने वाले डिलीवरी केस समेत अन्य गंभीर मरीजों को अपने यहां बुलाता है। इसके बदले उन्हें मोटा कमीशन और उपहार दिया जाता है। इसके चलते ही सीएचसी में डिलीवरी के केसों की संख्या काफी कम हुई है। आंकड़े बताते हैं कि एक महीने में सीएचसी में औसतन 500 डिलीवरी केस आते थे, जो लगातार घटकर 200 के आसपास रह गए हैं। सरकारी अस्पताल में घटती डिलीवरी की संख्या में इन आशा वर्करों की गड़बड़ी सामने आई तो अधीक्षक डॉ. एन चौहान को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने कुछ कर्मचारियों से मालूमात की तो इस झोलाछाप के बारे में पता चला। पहले तो वे चेतावनी देते रहे, मगर मामला नहीं सुधरा तो उन्होंने छापा मारने की तैयारी की। उन्हें पता चल गया कि बड़ागांव तिराहा पर झोलाछाप के यहां आशा वर्कर इकट्ठी है तो सोमवार को उन्होंने छापा मार दिया। वहां करीब 33 आशा वर्कर मिलीं, जिनकी वीडियोग्राफी करा ली गई है। अधीक्षक ने बताया कि मौके पर मिली सभी आशा वर्करों के निष्कासन की संस्तुति सीएमओ से कर दी गई है।