लखीमपुर खीरी/ओयल। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी तो खून की जांच का आंकड़ा भी लगभग तीन गुना अधिक हो गया है। सामान्य दिनों में जहां 200 से 250 मरीजों की जांच की जाती थी, मौजूदा समय में से 600 से 700 मरीजों की जांच हो रही है। कर्मचारियों को 10 से 12 घंटों तक काम करना पड़ता है। रात आठ से नौ बजे तक जांच रिपोर्ट तैयार की जाती है।
जिले में बुखार का प्रकोप बढ़ते ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। रोजाना 1600 से 1700 या इससे भी अधिक मरीज दवा लेने पहुंच रहे हैं। अधिकांश मरीज बुखार के होते हैं, ऐसे में डॉक्टर लगभग मरीजों को खून की जांच लिखी जाती है। रोजाना करीब 600 से 700 मरीजों की जांच की जाती है।
प्रत्येक की करीब पांच से सात प्रकार की जांच होती है, ऐसे में रोजाना करीब आठ से 10 हजार प्रकार की जांच की जाती है। लैब के कर्मचारी सुबह आठ बजे से रात आठ व नौ बजे तक काम करते हैं। सैंपल दोपहर एक बजे के बाद नहीं लिया जाता है, तब यह स्थिति है। जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा डेंगू, मलेरिया, टाइफाइटेल, एलएफटी, लिवर, किडनी, थायराइड आदि जांच हो रही है।
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अगले दिन मिलती है रिपोर्ट, तब मिल पाती है दवा
भीड़ अधिक होने पर कई मरीजों को एक दिन में दवा नहीं मिल पाती है। पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर को दिखाना पड़ता है तो डॉक्टर खून जांच लिख देते हैं। खून जांच की रिपोर्ट उस दिन नहीं मिल पाती है। अगले दिन खून जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मरीज को फिर से डॉक्टर को दिखाना पड़ता है, उसके बाद डॉक्टर दवा लिखते हैं।