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...तो धान खरीद में खेल कर रहे आढ़ती

Mon, 23 Nov 2015 11:24 PM IST
लखीमपुर खीरी
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सरकार ने धान खरीद का लक्ष्य पूरा करने और किसानों को सहूलियत देने की मंशा से 63 आढ़तियों को भी बतौर कमीशन एजेंट धान खरीद की अनुमति दी है, जिसके लिए उन्हें निर्धारित कमीशन भी दिया जा रहा है। जबकि हकीकत में आढ़तियों के क्रय केंद्र कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। न ही इनके कहीं बैनर है और न कांटे लगे हैं। किसानों को भी इन केंद्रों के बारे में जानकारी नहीं है, बल्कि मंडी में फड़ पर 900 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान बेचने को विवश हैं। ऐसे में इन आढ़तियों यानी कमीशन एजेंट द्वारा की जा रही धान खरीद सवालों के घेरे में हैं।
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जिले में किसानों से सीधे धान खरीद के लिए नौ सरकारी एजेंसियों के 110 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिन पर एक लाख 39 हजार 640 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा सरकार ने धान खरीद में तेजी लाने और किसानों को सहूलियत प्रदान करने के लिए आढ़तियों को कमीशन एजेंट के तौर पर धान खरीद करने की अनुमति दी है। इसी के तहत जिले के अलग-अलग हिस्सों में 63 आढ़तियों को मूल्य समर्थन योजना के तहत धान खरीद करने की अनुमति दी। डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आढ़तियों के केंद्र कहीं दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। खासकर मंडियों में इनका कहीं बैनर नहीं है और न ही कांटा लगा है।
अफसर भी आढ़तियों के धान खरीद केंद्र के स्थान के सवाल पर कन्नी काट रहे हैं। जबकि अधिकांश आढ़तियों को मंडी में दुकानें एलाट हैं, लेकिन एक भी बैनर नहीं दिखाई दिया। इन आढ़तियों को सरकारी एजेंसियों के माध्यम से धान खरीद करने की अनुमति डीएम द्वारा दी गई है, जिसमें 51 आढ़तिए विपणन शाखा और 12 आढ़तिए पीसीएफ से संबद्घ किए गए हैं। इस तरह 173 क्रय केंद्र खोले जाने के बावजूद किसानों को सरकार द्वारा घोषित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
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51 आढ़तियों ने खरीदा 25 हजार एमटी से अधिक धान
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो 22 नवंबर तक विपणन शाखा से संबद्घ 51 आढ़तियों ने 25, 473 मीट्रिक टन धान की खरीद कर डाली हैै। वहीं पीसीएफ से संबद्ध आढ़तियों द्वारा अब तक की गई धान खरीद की रिपोर्ट विभाग के पास नहीं पहुंची है।
ऐसे हो रहा गोरखधंधा
आढ़तियों को सरकारी रेट पर किसानों से धान खरीद करने के लिए मंडियों में दुकानें एलाट की गई है, जहां पर बैनर-कांटा लगाकर खरीद करने के निर्देेश हैं। हकीकत बिल्कुल इसके उलट है, क्योंकि अधिकांश आढ़ती राइस मिलर्स हैं। यह मंडी में नीलामी के जरिए किसानों से औने-पौने मूल्य पर धान खरीद करते हैैं और फिर उसका खुद ही सरकारी दर पर भुगतान प्राप्त करते हैं।
डीएफएमओ अर्जुन प्रसाद पाठक ने बताया कि जिले में 63 आढ़तियों को सरकारी एजेंसियों के माध्यम से खरीद करने की अनुमति दी गई है। अधिकांश को मंडियों में क्रय केंद्र खोलने के लिए जगह एलाट की गई है। यदि कहीं केंद्र नहीं बनाया गया है, तो संबंधित आढ़तिए के खिलाफ जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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