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कोरोना से जंग में योद्धा बनकर डटीं बेटियां

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गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। कोरोना कोविड-19 संक्रमण से जहां एक ओर देश-दुनिया जूझ रही है। वहीं देश की बेटियां कहीं पुलिस की सिपाही के रूप में तो कहीं स्वास्थ्य कर्मी के रूप में कोरोना से जंग में योद्धा की तरह डटी हैं। अपनों से दूर अपने बलबूते बुलंद हौसलों और चट्टान जैसी अडिग ये बेटियां अपने फर्ज को बखूबी अंजाम दे रहीं हैं। जहां उनके अभिभावक उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं बेटियां समाज की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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गांव घरथनियां निवासी एएनएम रंजना यादव का कहना है कि वह 2019 में स्वास्थ्य सेवा में आईं। समाज की सेवा का संकल्प लिया है। वह दो सदस्यीय, पांच टीमों की सुपरवाइजर हैं। कोरोना महामारी के संकट काल में अपने फर्ज को पूरी ईमानदारी से अंजाम दे रहीं हैं।
मेरठ निवासी महिला आरक्षी नेहा यादव का कहना है कि उसने 2018-19 में पुलिस फोर्स ज्वाइन की। कुछ नया कर गुजरने की तमन्ना है। कोरोना संक्रमण में अपने फर्ज को पूरी शिद्दत से अंजाम दे रहीं हैं। पिता प्रमोद कुमार, मां कमला देवी, भाई आशीष को चिंता रहती है, लेकिन परिवार से पहले वह अपने फर्ज को महत्व देतीं हैं।
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ममरी निवासी आशा वर्कर उपासना देवी का कहना है कि घर पर आठ वर्षीय बेटी को छोड़कर काम पर निकलती हैं। प्रतिदिन स्वयं को कोरोना वायरस से बचाते हुए 50 से 60 परिवारों का स्वास्थ्य परीक्षण करना जोखिम भरा है, लेकिन यह भी जरूरी है। लोगों को भी इस संकट को महसूस करना चाहिए।
बुलंदशहर निवासी आरक्षी दीपिका त्यागी ने बताया कि घर से 300 किलोमीटर दूर सर्विस करने को लेकर थोड़ा चिंतित थी लेकिन समय के साथ हौसला बढ़ता गया। कोरोना कॉविड 19 के खतरे के साये में ड्यूटी का पूरी ईमानदारी से निर्वाह कर रहीं हैं।
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