लखीमपुर खीरी। निर्भया कांड के दोषियों को फांसी में हो रही देरी से छात्राओं में रोष है। उनका कहना है कि मानवाधिकार की सहूलियत का अपराधी नाजायज फायदा उठा रहे हैं। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट नेे फांसी की सजा पर मुहर लगा दी है तो एक-एक कर डाली जा रही दया याचिका के नाम पर अब तक उन्हें जिंदा क्यों रखा गया है। निर्भया ही नहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में जितने दुष्कर्म के दोषी ठहराए जा चुके हैं। उन्हें भी आजीवन कारावास के बजाय फांसी ही दी जानी चाहिए, जिससे इस प्रकार के जघन्य अपराधों पर रोक लग सके। छात्राओं का कहना है कि निर्भया के दरिंदे कानून के लचीलेपन का फायदा उठा रहे हैं। इसलिए उन्हें बिना समय गंवाए फांसी दे देनी चाहिए।
अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत शनिवार को आर्यकन्या डिग्री कॉलेज की छात्राओं ने फांसी न होने पर आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिटिया के साथ हैवानियत करने वालों को हैदराबाद के आरोपियों की तरह सजा मिलनी चाहिए थी।
बोलीं छात्राएं-जल्द से जल्द दी जाए फांसी
सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। मगर, बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए शांत बैठी है। इस तरह जहां कोर्ट का समय खराब हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर आरोपियों के हौसले बढ़ रहे हैं।
-लक्ष्मी पांडे, छात्रा, बीए, द्वितीय वर्ष
निर्भया के दरिंदों को जल्द से जल्द से फांसी दी जानी चाहिए। जब कोर्ट सजा सुना चुकी है तो फिर इसमें देरी क्यों की जा रही है।
-शिवानी वाजपेई, छात्रा, एम प्रथम वर्ष
निर्भया के साथ हैवानियत करने वालों को बीच चौराहे पर फांसी दी जानी चाहिए। नाबालिग होने के चलते जिस आरोपी को सजा नहीं हुई है उसे भी फांसी होनी चाहिए, क्योंकि अपराधी वह भी है।
-खुशी जायसवाल, छात्रा, एमए प्रथम वर्ष
निर्भया के दरिंदों को फांसी दिए जाने में जो लोग बाधक बने हुए हैं। उनके लिए भी सजा का प्रावधान होना चाहिए।
-चांद बानो, छात्रा, बीए तृतीय वर्ष