विचाराधीन बंदियों के माता-पिता की मृत्यु होने, परिवारीजनों की शादी या मकान निर्माण के लिए बंदियों को सीमित अवधि का पैरोल डीएम के यहां से मिलेगा। जिला स्तरीय समिति की बैठक में इस बाबत निर्णय लेते हुए बंदियों से डीएम के यहां आवेदन करने के लिए कहा गया है। समिति ने कहा है कि ऐसे बंदियों को डीएम के आदेश के बाद पुलिस अभिरक्षा में व्यक्तिगत कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति मिलेगी।
जिला जज बीडी मिश्रा, सह अध्यक्ष डीएम किंजल सिंह, एसपी अरविंद सेन और सदस्य सचिव जेल अधीक्षक विनोद कुमार समेत अधिकारियों की कारागार में हुई बैठक में इस बिंदु को कार्यवृत्त में शामिल किया गया है। अभी ऐसे मामलों में कारागार में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों को सीमित अवधि का पैरोल संबंधित कोर्ट के आदेश पर दिया जाता है। समिति ने इस बिंदु पर विचार-विमर्श करने के बाद विचाराधीन बंदियों से जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि बैठक में इस संबंध समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय किया है। इसे कार्यवृत्त में भी शामिल कर लिया गया है। यह भी निर्णय किया है कि जो भी बंदी कारागार में निरुद्ध हैं, उनके आने के दो माह के उपरांत भी यदि जमानत नहीं हो पाती है तो उसकी जमानत के लिए कारागार पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, खीरी में तैनात वकीलों को लिखित रूप से अवगत कराते हुए उसका अंकन बंदी के हिस्ट्री टिकट पर भी किया जाए।
जेल से रिहा न होने वाले बंदियों की सूची मांगी
समिति ने कहा है कि कारागार में लोक अदालत का आयोजन पाक्षिक किया जाए तथा उसमें कितने मामले प्रस्तुत हुए, इनमें कितने निस्तारित हुए और कितने शेष हैं। इसकी सूचना जिला जज के समक्ष रखी जाए। साथ ही उन बंदियों की भी सूचना मांगी गई है जिनकी जमानतें हो गई हैं लेकिन वे अभी जेल ही निरुद्ध हैं।
दो वर्ष की सजा काट चुके बंदियों की सूची मांगी
समिति ने कहा है कि जिन बंदियों की सजा तीन वर्ष से अधिक और चार वर्ष से कम है और उन्होंने अपनी सजा का दो वर्ष काट लिया है। ऐसे बंदियों की सूची जिला जज को उपलब्ध कराई जाए। जेल मैनुअल के प्रावधानों के मुताबिक ऐसे बंदियों को सीमित अवधि का पैरोल स्वीकृत करने की कार्रवाई की जाए। जिन बंदियों की रिहाई में कोई कठिनाई आ रही है जैसे वे अपनी जुर्माने की धनराशि जमा करने में अक्षम हो या उसका कोई जमानतदार न हो। ऐसे बंदियों की सूची जिला प्रोबेशन अधिकारी के साथ साथ जिला जज को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।