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एक साथ किया प्रेमी-प्रेमिका के शव का अंतिम संस्कार

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लखीमपुर खीरी। छाउछ नहर कॉलोनी के पास पीलीभीत-बस्ती हाईवे के किनारे अपने खोखे पर हत्या का शिकार हुए संगीता और खुद को गोली से उड़ाने वाले उसके प्रेमी सतीश के शवों का शुक्रवार को एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। दोनों करीबी रिश्तेदार थे, इसलिए परिवार वालों ने ऐसा किया। पोस्टमार्टम के बाद परिवार वाले उनके शव खमरिया गांव ले गए थे।
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थाना मितौली के गांव पहार निवासी संगीता देवी की शादी गांव खमरिया (महोली) निवासी सुरेंद्र पासी के साथ हुई थी। कुछ दिन बाद संगीता का पड़ोस में रह रहे चचेरे देवर सतीश से प्रेम संबंध हो गए थे। उन दोनों के संबंधों के कारण आठ साल पहले सुरेंद्र और संगीता के रिश्ते में दरार पड़ गई और दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए। पांच महीने से छाउछ नहर कॉलोनी के एक मकान में संगीता किराए पर रहने लगी थी। सतीश यहां शाम को आता और सुबह चला जाता था। सतीश को शक था कि संगीता किसी दूसरे से बात करती है। इसी को लेकर दोनों के रिश्ते में खटास आ गई थी। बृहस्पतिवार की सुबह करीब 11.30 बजे सतीश ने लकड़ी के खोखे में रखी अपनी दुकान पर बैठी संगीता की गोली मारकर हत्या कर दी। उसके बाद खुद को गोली से उड़ा लिया था। शुक्रवार को मृतका संगीता के पहले पति सुरेंद्र के पिता रामरतन, मृतक सतीश का भाई अनिल कुमार परिवार के कई लोगों और ग्राम प्रधान सदानंद के साथ लखीमपुर पहुंचे। परिजनों के आने के बाद पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया। दोनों शव घर वालों को सौंप दिए। परिवार वालों ने बताया कि सुरेंद्र और सतीश चचेरे भाई थे। सतीश भी शादीशुदा था। उसकी पत्नी अर्चना और बेटा प्रांजल (12) है। आठ साल पहले सुरेंद्र से रिश्ते तोड़ने के बाद सतीश पत्नी और बच्चे को छोड़कर कहीं चला गया। संगीता भी घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद से दोनों का कोई पता नहीं चला था। सुरेंद्र ने दूसरा विवाह कर लिया था। पोस्टमार्टम के बाद परिवार वाले दोनों शव लेकर गांव लौट गए। जहां एक साथ दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया।
गांव खमरिया (महोली) निवासी अनिल कुमार ने बताया कि वह तीन भाई थे। जिनमें सतीश सबसे छोटा था। बड़े भाई अशोक की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। सतीश आठ साल से घर नहीं गया है। सतीश की शादी दोस्तपुर (हरगांव) की अर्चना के साथ हुई थी। उसके एक पुत्र प्रांजल है। सतीश के छोड़कर आने के बाद से वही पत्नी और बच्चे की देखभाल करते हैं।
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मृतक संगीता के पहले पति सुरेंद्र के पिता (मृतका के ससुर) रामरतन ने बताया कि सतीश सुरेंद्र का चचेरा भाई था। सतीश को काफी समझाया बुझाया गया, लेकिन दोनों नहीं माने। उन्होंने बताया कि दोनों शवों का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया है। दोनों की मौत से परिवार के लोग गमजदा हैं।
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