पहले फसलों का नुकसान हुआ, फिर बाढ़ ने घर और खेत को लील लिया। इस आफत के बाद किसानों को शासन से राहत की उम्मीद थी मगर वो भी टूट गई। धौरहरा तहसील के गांव भदईपुरवा के किसान इतने नाउम्मीद हुए कि कुछ भी कर गुजरने पर उतारू हो गए। गुरुवार को 36 पुरुष-महिलाएं और उनके 12 बच्चे मुआवजे की मांग को लेकर गांव के पास से गुजरने वाले घाघरा नदी के बीचोबीच जाकर खड़े हो गए और सामूहिक रूप से जल समाधि की चेतावनी दे दी। यह जगह किनारे से करीब ढाई सौ मीटर दूर थी। इस ऐलान के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। सूचना मिलने पर आनन-फानन में एसडीएम और सीओ वहां पहुंचे और आश्वासन दिया। फिर करीब छह घंटे बाद सभी लोगों को मोटरबोट से नदी से बाहर निकाला गया।
डीएम के आश्वासन पर माने ग्रामीण्ा ः ग्रामीणों के जलसमाधि लेने की जानकारी होने पर सबसे पहले एसओ ईसानगर रामकुमार यादव मौके पर पहुंचे और नदी में उतरे सभी लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन ग्रामीणों ने एसओ की बात नहीं सुनी। इसी बीच तहसीलदार, एसडीएम और सीओ भी मौके पर पहुंच गए और मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीण अपनी जिद पर अड़े रहे। बार-बार कहने के बावजूद जब ग्रामीण अपनी बात से टस से मस नहीं हुए तो फ्लड पीएसी को बुला लिया गया। एसडीएम ने गांव के इश्तियाक और वहीद की बात फोन पर डीएम से कराई। डीएम ने ग्रामीणों को हर संभव मदद का भरोसा दिया। जिसके बाद एसडीएम और सीओ स्टीमर से इश्तियाक और वहीद को लेकर नदी में खड़े ग्रामीणों के पास पहुंचे और डीएम से मिले आश्वासन की जानकारी दी। तब जाकर जल समाधि लेने की जिद पर अड़े ग्रामीणों के तेवर नरम हुए। एसडीएम के निर्देश पर नदी में घुसे 12 बच्चों को सबसे पहले बाहर निकाला गया फिर अन्य लोगों को। एसडीएम ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि जल्द ही गांव में कटान रोकने के प्रयास शुरू किए जाएंगे।
प्रति परिवार मुआवजे की मांग पर अटका पेच
भदईपुरवा मे घाघरा नदी भीषण कटान कर रही है। प्रशासन के अनुसार यहां अब तक 26 घर कट चुके हैं, जबकि ग्रामीण कटे हुए घरों की संख्या 72 बता रहे हैं। पक्के घरों के कटने पर 98000 रुपये और कच्चे झोपड़ी वाले घरों के कटने पर 4100 रुपये दिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें प्रति परिवार के हिसाब से मुआवजा दिया जाए जबकि प्रशासन एक घर पर मुआवजा देने की बात कर रहा है।