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जिपं अध्यक्ष चुनाव पर टिकी सबकी निगाहें

Wed, 30 Dec 2015 12:03 AM IST
लखीमपुर-खीरी
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जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव के चलते जिले में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। समाजवादी पार्टी के सिवा किसी दूसरे राजनीतिक दल ने अपनी रणनीति का अभी तक खुलासा नहीं किया है। इसके चलते चुनाव की तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। सपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बंशीधर को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। जबकि दूसरी पार्टियां अभी संभावनाएं ही तलाश रही हैं।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए एक जनवरी को नामांकन होने हैं। भाजपा और बसपा अध्यक्ष पद के चुनाव में उतरेगी भी या नहीं इस बाबत इन दलों ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। 72 सदस्यीय जिला पंचायत में पार्टीवार संख्या बल पर गौर करें तो सपा मजबूत स्थिति में है। भाजपा और बसपा पार्टी अध्यक्षों का कहना है कि उन्हें प्रदेश नेतृत्व से हरी झंडी का इंतजार है।
खीरी जिला पंचायत पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने समय के शीर्ष और प्रभावशाली राजनेताओं का कब्जा रहा है। चाहे वह कमाल अहमद रिजवी हों या बंशीधर राज, पूर्व कैबिनेट मंत्री रामकुमार वर्मा की पत्नी लीला देवी, पूर्व विधायक अरविंद गिरि की अनुज वधू अनीता गिरि और बसपा के कद्दावर नेता रहे जुगुल किशोर की पत्नी दमयंती किशोर या फिर पूर्व विधायक तेज नरायन त्रिवेदी सभी राजनीति के दिग्गज रहे हैं। इसके चलते जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी प्रतिष्ठापूर्ण बनी है।
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कमाल अहमद रिजवी सबसे ज्यादा समय रहे अध्यक्ष
वर्ष 1926 में गठित जिला परिषद बाद में जिला पंचायत कहलाई। जिला पंचायत में अब तक 16 राजनेता अध्यक्ष पद की कुर्सी संभाल चुके हैं। इनमें अभी तक कमाल अहमद रिजवी ही एक मात्र ऐसे राजनेता थे जो तीन बार जिला परिषद अध्यक्ष रहे। वह अलग-अलग वर्षों में कुल 16 साल तक अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन रहे। जबकि राजा प्रताप बहादुर सिंह 12 साल और श्रीराम गुप्ता सात साल अध्यक्ष रहे। जिला परिषद और जिला पंचायत की कमान 20 बार प्रशासकों के हाथ रही। 
सबसे छोटा कार्यकाल रहा अनूप वर्मा का
खीरी जिला पंचायत में सबसे छोटा कार्यकाल अनूप वर्मा का रहा। अनीता गिरि के बाद अनूप कुमार वर्मा ने नौ अगस्त 2015 को कार्यभार संभाला और 13 जनवरी 2011 को नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। बसपा की दमयंती किशोर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद सपा की कमल पाल के नेतृत्व में प्रशासनिक कमेटी का गठन किया गया। जो करीब साढ़े तीन महीना कार्यरत रही। बाद में कमल पाल जिला पंचायत अध्यक्ष बनी जो अभी तक पद पर हैं।
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