परिवार वालों का कहना है कि उन्होंने इसकी सूचना थाना पुलिस को भी दी लेकिन मौके पर पहुंचे एक दरोगा ने जबरन फैसला लिखवा दिया। उनको मजलूमी चिट्ठी तक नहीं दी। जब परिवार वाले बालक को जिला अस्पताल ले गए तो वहां बिना मजलूमी चिट्ठी के बालक को भर्ती नहीं किया। इससे परिवार वाले उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां भी अभी तक बालक का ऑपरेशन कर छर्रा नहीं निकाला गया है। बालक अभी भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। उसकी हालत काफी खराब है।
मूसाझाग थाने के एसओ शिवेंद्र भदौरिया ने कहा कि परिवार वालों ने खुद लिखकर दिया है कि वह कार्रवाई कराना नहीं चाहते। वह अपनी मर्जी से बालक को ले गए थे। अगर वे कहते एफआईआर दर्ज करें तो हम एफआईआर दर्ज कर लेते। कोई लौटकर थाने नहीं आया है।