बच्चों में सुधार के बजाय बढ़ रही कुपोषितों की तादात
पीड़ितों के इलाज में कोताही बरत रहे जिम्मेदार
37,476 बच्चे अतिकुपोषित, कुपोषितों की संख्या डेढ़ लाख पार
बच्चों की सेहत पर कुपोषण की पकड़ ढीली नहीं हो रही है, बल्कि कुपोषितों की तादात बढ़ती जा रही है। राज्य पोषण मिशन के तहत जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों की सेहत सुधारने के लिए हौसला पोषण योजना शुरू हुए तीन माह बीत चुके हैं, लेकिन बच्चों की सेहत में खास सुधार नहीं आया है। कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की संख्या घटने के बजाय बढ़ रही है। अक्तूबर 2016 में कराए गए सर्वे में ऐसे ही हालात सामने आए हैं। जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में आधे से अधिक बेड खाली पड़े हैं, क्योंकि अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराने में कोताही बरती जा रही है।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग और स्वास्थ्य विभाग को संयुक्त रूप से कुपोषण को खत्म करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन दोनों विभाग कुपोषण की लड़ाई में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। हौसला पोषण योजना के तहत 10 अगस्त से आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन कुपोषित बच्चों को 20 ग्राम देशी घी खिलाया जा रहा है। इसके अलावा मिड डे मील की तर्ज पर भोजन और फल- स्नेक्स वितरित करने की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद बच्चों में कुपोषण की दर घटने की बजाय बढ़ती जा रही है। अक्तूबर 2016 में 37,476 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में रखे गए हैं, जबकि कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 1.62 लाख से अधिक हो चुकी है। बताते चलें कि पांच माह पहले अप्रैल 2016 मेें 38,323 अतिकुपोषित (लाल श्रेणी) बच्चे चिन्हित किए गए थे, जबकि कुपोषित (पीली श्रेणी) बच्चों की तादात एक लाख 28 हजार 172 थी।
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने में कोताही
अतिकुपोषित बच्चों का त्वरित इलाज कराने के आदेश है, जिसमें एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी वर्कर को भर्ती कराने की जिम्मेदारी दी गई है। जिला अस्पताल में संचालित 10 बेड क्षमता वाले पोषण पुनर्वास केंद्र पर अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराने में कोताही बरती जा रही है। नवंबर माह में सिर्फ दो बच्चे दो माह की सपना और डेढ़ वर्षीय अलीना भर्ती हुई, जिसमें अलीना को ओपीडी से भर्ती किया गया। अक्तूबर में भी चार बच्चे भर्ती हुए, जिसमें दो बच्चे पांच वर्षीय अरमान और पांच वर्षीय राधा ओपीडी से भर्ती किए गए। जबकि सितंबर माह में 13 बच्चों का इलाज किया गया। न्यूट्रिनिएस्ट दिव्या चतुर्वेदी ने बताया कि भर्ती बच्चे के साथ रहने वाली मां को भी दोनों समय भोजन दिया जाता है। इसके अलावा इलाज के दौरान बच्चे की मां या अभिभावक को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भत्ता दिया जाता है।
मिशन के तहत कुपोषित बच्चों में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका परिणाम भी सामने आया हैै। अतिकुपोषित श्रेणी के बच्चों की संख्या में कमी आई है, लेकिन सितंबर में आंगनबाड़ी वर्कर्स के हड़ताल में चले जाने से अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।
अखिलेंदु दुबे, जिला कार्यक्रम अधिकारी