लखीमपुर खीरी। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए नया कानून लागू हुए करीब पांच माह बीतने को हैं, लेकिन अब तक इसका असर नहीं दिखा है। किसानों के लिए आज भी पहले जैसे हालात बने हुए हैं। नए कानून के लागू होने के बाद खरीफ सीजन में किसानों को अपना धान औने-पौने दामों पर बेचना पड़ा है। लिहाजा नए कानून के प्रावधानों को लेकर किसानों में जिज्ञासा भी बहुत है और इसके परिणामों को देखने के लिए उत्सुकता भी है।
कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार और किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कामर्स (प्रोमोशन एंड फैसिलिएशन) ऑर्डिनेंस 2020 लागू होने के बाद अब तक जो सबसे बड़ा असर देखने को मिला है, वह यह है कि पूरे देश में मंडियों से बाहर कृषि उत्पादों पर लगने वाला मंडी शुल्क समाप्त हो गया है। लाइसेंस प्रणाली खत्म होने से मंडी परिसर के बाहर भी व्यापारियों ने कृषि उत्पाद खरीदना प्रारंभ कर दिया है, जिस पर उसे कोई मंडी शुल्क नहीं देना है। इससे अब तक व्यापारियों को फायदा होता दिख रहा है, लेकिन किसानों के फायदे के लिहाज से अब तक कोई एक्शन देखने को नहीं मिला हैै। हालांकि नए कानून में किसानों और ट्रेडर्स के बीच सीधा व्यापार जोड़ने की बात कही गई है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी। मंडी शुल्क और लाइसेंस की बाध्यता समाप्त होने से किसानों के सभी प्रकार के उत्पादों का बाजार सभी के लिए खुल गया है। गन्ना, गेहूं, चावल, दालें, दूध, इडिबल ऑयल, सब्जियां, फल, मसाले, मछली, बकरी, पोल्ट्री फार्म को नए कानून में किसानों का उत्पाद बताया गया है। किसानों और ट्रेडर्स (कंपनियां/संस्थाएं) के बीच इकोसिस्टम का माहौल बनाने पर जोर रहेगा, जिससे किसान अपने उत्पादों की उचित कीमत का आकलन करके अपना मूल्य प्राप्त कर सके।
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किसानों के लिए बनेंगे अनेक व्यापार चैनल
कृषि मामलों के जानकार बताते हैं कि नए कानून से कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव आएंगे। अभी लोगों को इसका अंदाजा नहीं है, लेकिन जिस तरह सरकार ने किसानों के उत्पादों को सभी प्रकार के टैक्स से छूट दे दी है। वहीं किसानो के लिए वैकल्पिक प्रतिस्पर्धी व्यापार चैनलों की व्यवस्था होगी, तब बड़ी कंपनियां सीधे किसानों से उनके उत्पादों को खरीदने के लिए इलेक्ट्रानिक प्लेटफार्म चालू करेंगी, उस दिन से बदलाव नजर आने लगेगा।
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सरकारी दखल भी होगा खत्म
किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए मंडी तक नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि किसानों के घर, खेत, खलिहान से खरीदना सभी की जिम्मेदारी बन जाएगी। इससे किसानों को अपना उत्पाद कहीं भी ले जाने में दिक्कत नहीं आएंगी, क्योंकि अब कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी उनसे कोई कागज नहीं मांग सकेगा।
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बिचौलियों के गठजोड़ से मिलेगा छुटकारा
मंडी में कारोबार करने वाले आढ़तियों, बिचौलियों और गांव के छोटे व्यापारियों को झटका लगना तय माना जा रहा है, क्योंकि नई व्यवस्था के अमल में आते ही इनका नेटवर्क टूट जाएगा। गांवों के छोटे व्यापारियों और बिचौलियों को किसानों से औने-पौने दामों में गेहूं-धान खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
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विधेयक में किसानों के लिए कई लुभावनी बाते कही गई हैं, जिससे लगता है कि सुधार आएगा। अभी इसका असर देखने को नहीं मिला है। सरकार जल्द इसे लागू कराए, जिससे बदहाल किसानों की स्थिति में सुधार आए।
-ललित वाजपेयी, प्रगतिशील किसान
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नए कानून में किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलाने की बात कही गई है, जिसके लिए कई अतिरिक्त व्यापार चैनल बनाए जाएंगे। सरकार को इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, जिससे किसानों की उम्मीदों को बल मिल सके।
-सीताराम सिंह, प्रगतिशील किसान
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पहले से चली आ रही व्यवस्था में किसानों का शोषण ही होता आया है। अब नए कानून से कुछ तो बदलाव आएगा। सरकार ने किसानों के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा लाने के लिए नए व्यापार चैनल बनाने की बात कही है।
-सोबरन मिश्रा, प्रगतिशील किसान
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किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकारें समय-समय पर सिर्फ वायदें करती आई हैं, लेकिन मोदी सरकार ने तीन नए कृषि कानून बनाकर बदलाव लाने के संकेत दिए हैं। इससे किसानों को उनकी उपज का कितना उचित मूल्य मिल पाता है, वह आने वाला समय ही बताएगा।
-संतोष कुमार, प्रगतिशील किसान