लखीमपुर खीरी। गन्ने की फसल में रेड रॉट (लाल सड़न रोग) बीमारी के प्रकोप से हजारों किसान प्रभावित हुए हैं और इससे गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। प्रदेश के 13 जिले इस बीमारी से प्रभावित हैं, जिसमें लखीमपुर भी शामिल है।
गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने अभियान चलाकर रेड रॉट बीमारी की प्रभावी रोकथाम करने के निर्देश दिए हैं। जिन क्षेत्रों में गन्ने की फसल 20 प्रतिशत से अधिक प्रभावित है, उनकी तुरंत कटाई कर संबंधित चीनी मिल या कोल्हु-क्रशर पर सप्लाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश पटेल ने बताया कि इस बार जनपद में 2543 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की फसल रेड-रॉट रोग से प्रभावित हुई है, जिससे किसानों को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा हैै। ज्यादातर मामलों में 0.238 अर्ली प्रजाति में रेड रॉट रोग पाया गया है, जिसकी बुआई पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसलिए किसानों से अपील है कि 238 प्रजाति गन्ने की बुआई कतई न करें, बल्कि गन्ना समितियों के माध्यम से अच्छी प्रजाति के गन्ने की बुआई ही करें। जिन खेतों में गन्ने की फसल रेड रॉट से प्रभावित हुई है, उनमें गन्ने की कटाई के बाद ठूंठों को जला दें। इसके बाद खेत की जुताई करके गेहूं या अन्य फसल उगाएं। गन्ना अधिकारी ने जोर देकर कहा कि कम से कम एक साल तक उस खेत में गन्ने की फसल दोबारा न लें। उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए बताया कि जहां बीमारी का प्रभाव 20 प्रतिशत से कम है, वहां रोगग्रस्त पौधों का पूरा क्लंप उखाड़कर जला दें और उस स्थान पर ब्लीचिंग पाउडर डालकर मिला दें। शेष खड़ी फसल में सिस्टमिक फंजीसाइड जैसे कार्बेंडाजिम, थियोफिनेटमिथाइल या हेक्साटाप का प्रत्येक माह छिड़काव करें। जैव पेस्टीसाइड ट्राइकोडर्मा 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में डाले। गन्ना अधिकारी ने बताया कि लाल सड़न रोग ऐसी बीमारी है, जिसे प्रबंधन द्वारा ही प्रभावी तौर से रोका जा सकता है।
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रेड-रॉट प्रभावित खेत में न बोएं गन्ना
अगले पेराई सत्र 2021-22 में रेड रॉट रोग से प्रभावित खेतों में दोबारा गन्ना उगाने वाले किसानों का सर्वे एवं सट्टा नहीं किया जाएगा। न ही इस गन्ने की आपूर्ति चीनी मिलों में कराई जाएगी।
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रेड-रॉट की रोकथाम के लिए हुए उपाय
जनपद में 2543 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की फसल रेड रॉट रोग से प्रभावित हुई है। इसमें 38 हेक्टेयर गन्ने की फसल को नष्ट कराया गया है, जबकि 2248 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल करके रोकथाम के प्रयास किए गए हैं। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश पटेल ने बताया कि 1.30 लाख किग्रा ब्लीचिंग पाउडर और 50,800 किग्रा हेक्साटाप रसायन का वितरण किसानों में किया गया है। इसके अलावा 1.22 लाख लीटर ट्राईकोडर्मा तरल और 53500 किग्रा ट्राईकोडर्मा पाउडर का वितरण किया गया है।
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रेड रॉट की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को जागरूक करने के लिए गोष्ठियां कराई जाएंगी। प्रभावित खेतों में प्रजाति 0238 के स्थान पर दूसरी प्रजातियों जैसे 0118, 13235, 4201, 8272, 94184, 98014 की बुवाई करने की सलाह किसानों को दी गई है।
-ब्रजेश पटेल, जिला गन्ना अधिकारी