लखीमपुर खीरी। गन्ना विकास आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने गन्ना किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही खाद की आपूर्ति करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जरूरत से ज्यादा खाद का प्रयोग करने से किसानों को अधिक लागत के रूप में नुकसान हो रहा है, तो वहीं मृदा की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित हो रही है। गन्ना शोध परिषद की मृदा परीक्षण के बाद तैयार की गई मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर गन्ना आयुक्त ने कहा है कि अधिकतर नमूनों की मृदाएं समक्षारीय प्रकृति की हैं, जिनका पीएच लेवल अभी सामान्य है। मृदा में आर्गेनिक कार्बन का स्तर सामान्य से नीचे पाया गया है।
जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर वितरित की गई खाद का प्रभाव जानने के लिए विभिन्न स्थानों से मृदा नमूनों की जांच कर मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें लखीमपुर के भी नमूने शामिल किए गए थे। मृदा नमूनों के परीक्षण के बाद गन्ना शोध परिषद ने मूल्यांकन रिपोर्ट गन्ना विकास आयुक्त को भेजी है। इसमें बताया गया है कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर खेतों में खाद डालने वाले किसानों की संख्या बेहद कम है। रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा की प्रकृति समक्षारीय हो गई है। इससे किसानों को अभी से सजग होने की जरूरत है। मृदा में आर्गेनिक कार्बन का घटता स्तर भी किसानों की चिंता बढ़ाने वाला है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और मैगनीज की कमी पाई गई है, जिसका गन्ने की फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ट्रैश मल्चिंग से होगी आर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की पूर्ति
गन्ना आयुक्त ने मृदा में आर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की पूर्ति करने के लिए ट्रैश मल्चिंग विधि अपनाने पर जोर दिया है। फसल अवशेष को जलाने के बजाय ट्रैश मल्चिंग से कार्बनिक खाद तैयार की जाए। मृदा में फास्फोरस की कमी को पूरा करने के लिए डीएपी 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर की दर से प्रयोग करने की सलाह दी है। मैगनीज की कमी को दूर करने के लिए 10 किलोग्राम मैगनीज सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करने की सलाह किसानों को दी है।
गन्ना विकास समितियों के सचिवों को निर्देश जारी किए हैं कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही किसानों को खाद वितरण करेंगे। बिना कार्ड के आधार पर खाद बेचने वाले कर्मचारियों/अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करके कार्रवाई किए जाने के निर्देश गन्ना आयुक्त ने दिए हैं। गन्ना आयुक्त ने उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए गोबर की खाद, बायोफर्टिलाइजर और हरी खाद के प्रयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं।
- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी