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अब महिला समूह भी बढ़ाएंगी गन्ने की मिठास

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लखीमपुर खीरी। खेती को उन्नत बनाने के साथ ही गन्ने की मिठास बढ़ाने में जनपद के महिला समूह भी अहम भूमिका निभाने जा रही हैं। परंपरागत तरीके से हो रही गन्ने की खेती का तरीका भी बदल जाएगा, क्योंकि अब पौधशालाओं (नर्सरी) में बड चिप विधि (सिंडलिग) से गन्ने की पौध तैयार की जाएगी। इसके बाद इन्हीं पौधों की किसान अपने खेत में धान की तरह रोपाई करेंगे। इस विधि से गन्ने की पौध तैयार करने के लिए एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के अभी 40 महिला समूहों को चुना गया है।
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गन्ना विकास विभाग के आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने ‘करके सीखों’ पद्धति के आधार पर महिला रोजगार सृजन योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश के 26 गन्ना उत्पादक जनपदों में खीरी भी प्रमुख स्थान पर है, क्योंकि करीब तीन लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती प्रति वर्ष की जाती है। स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमियों को गन्ने की पौध तैयार करने के लिए पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा। महिलाओं को बीज चयन, हस्तचलित मशीन से एकल आंख के टुकड़े काटना, ट्रे में अंकुरण, उगने का समय, रोपण की विधि के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं सिंडलिग विधि से गन्ने के पौधे तैयार कर उनकी बिक्री करके आय प्राप्त कर सकेंगी। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि राज्य सरकार महिला समूहों को 3.50 रुपये प्रति पौधे की दर से अनुदान देगी, जिससे समूह की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इस विधि से तैयार गन्ने की पौध रोगरहित होगी, जिससे गन्ना उत्पादन अच्छा होगा। किसानों को दो माह का गैप समय भी मिलेगा, जिससे वह इस दौरान कोई अन्य फसल प्राप्त करकेे आय बढ़ा सकता है।
गन्ना छिलाई से एक माह पहले निकालेंगे गन्ने की आंख
अभी तक खेत में गन्ने के टुकड़े डालकर बुआई की जाती है, लेकिन अब गन्ने की छिलाई से एक माह पहले यानी सितंबर-अक्तूबर में गन्ने से उसकी आंख निकाली जाएगी। इसे नर्सरी में क्यारियां बनाकर बोया जाएगा। इसके लिए महिला समूहों को ट्रेंड किया जाएगा। सांचे और कटर मशीनें गन्ना विभाग और चीनी मिलों के सहयोग से समूहों को उपलब्ध कराया जाएगा।
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बड चिप विधि से तैयार गन्ने की पौध का इस्तेमाल एनएफएसएम (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन) के तहत स्थापित होने वाली प्रदर्शनों की बुआई में किया जाएगा। इस वर्ष 300 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गन्ने की पौध से गन्ने की खेती का लक्ष्य मिला है। जिस हिसाब से पौध की मात्रा बढ़ेगी, उसी हिसाब से किसानों को पौध मिलना आसान हो जाएगा। तराई/बाढग़्रस्त क्षेत्र के किसानों को लाभ होगा। शीतकालीन गन्ने की बुआई के लिए खेत में अत्यधिक नमी होने के कारण बुआई की समस्या से निजात मिलेगी। इससे क्षेत्रफल में वृद्धि होगी।
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- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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