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पहले लॉकडाउन, फिर जमाखोरों ने बढ़ाई यूरिया की किल्लत

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लखीमपुर खीरी। राजापुर मंडी स्थित इफको के आउटलेट इफको किसान सेवा केंद्र पर पांच दिन से यूरिया उपलब्ध नहीं है, जिससे किसान बैरंग हो रहे हैं। ऐसे ही पैक्स, गन्ना विभाग समेत सभी सहकारी समितियों में यूरिया का टोटा है। डिमांड के सापेक्ष यूरिया खाद की आवक काफी कम होने से यदि एक गाड़ी आती भी है तो तुरंत ही उसे लेने के लिए किसानों की भीड़ उमड़ पड़ती है। इससे यूरिया गोदाम तक नहीं पहुंच पाती है, जिससे बाद में आने वाले लघु एवं सीमांत किसानों को बैरंग होना पड़ रहा है। बड़े किसानों ने यूरिया की ज्यादा मात्रा लेकर स्टॉक करना शुरू कर दिया है, जिससे छोटे किसानों के साथ ही अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है। क्योंकि समितियों पर खाद न होने से प्राइवेट दुकानदारों यूरिया पर ओवररेटिंग शुरू कर दी है। इस समस्या से निपटने के लिए डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने सहकारिता विभाग के पास रबी सीजन के लिए प्री पोजशनिंग स्टॉक में रखी 7500 मीट्रिक टन यूरिया में से 33 प्रतिशत यूरिया एक जुलाई से रिलीज करने का निर्णय किया है।
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लॉकडाउन होने के चलते अप्रैल और मई में लक्ष्य से 14 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति नहीं मिल सकी। हालांकि जून 2020 में नौ हजार मीट्रिक टन यूरिया सहकारी समितियों को मिल चुकी है, लेकिन डिमांड इससे दोगुनी है। विभागीय सूत्रों की माने तो बड़े किसान ज्यादा मात्रा में यूरिया लेकर जमा कर रहे हैं, जिससे छोटे किसानों को यूरिया से वंचित होना पड़ रहा है। ज्यादातर सहकारी समितियों पर यूरिया का टोटा है, जिससे मौके का फायदा उठाने के लिए प्राइवेट दुकानदारों ने ओवररेटिंग शुरू कर दी है। डीएम ने यूरिया की कालाबाजारी और ओवररेटिंग पर अंकुश लगाने के लिए एआर कोआपरेटिव, जिला गन्ना अधिकारी समेत समस्त उर्वरक निरीक्षकों को लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा डीएम ने अवैध भंडारण करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन खाद की जमाखोरी करने वाले किसानों पर कार्रवाई को लेकर अभी कोई रणनीति नहीं बनी है। इससे संभावना जताई जा रही है कि यूरिया की किल्लत से अभी कुछ और दिनों तक जूझना पड़ सकता है।
हफ्ते में एक बार आती है यूरिया
राजापुर मंडी स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर पांच दिनों से यूरिया स्टॉक में नहीं है। लिहाजा सेल्स इंचार्ज एनके चौधरी ने बाहर यूरिया स्टॉक में नहीं है की जानकारी किसानों को देने के लिए बोर्ड टंगवा दिया है। उन्होंने बताया कि हफ्ते में एक बार यूरिया की गाड़ी मिल पा रही है, जो कुछ घंटे में ही खत्म हो जाती है।
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प्रवासियों के आने से भी खेती-किसान बढ़ी
कोरोना महामारी का असर खाद की आपूर्ति पर पड़ा है, तो वहीं दूसरे प्रदेशों से आए 60 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिकों की वजह से खाद की किल्लत होना बताया जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक बाहर से प्रवासियों के आने से खेती-किसानी की ओर रुझान बढ़ गया है। काफी प्रवासी खेती करने में जुट गए हैं, जिससे यूरिया की डिमांड पिछले सालों की अपेक्षा काफी बढ़ गई है।
समितियों पर डिमांड ज्यादा होने से यूरिया की किल्लत हुई है, लेकिन जल्द ही समस्या दूर कर ली जाएगी। बुधवार को सीतापुर में लगी रैक से 1500 मीट्रिक टन यूरिया मिला है। एक जुलाई से प्री पोजशनिंग स्टॉक से 33 प्रतिशत यूरिया समितियों को दी जाएगी।
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-रत्नाकर सिंह, एआर कोआपरेटिव
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