लखीमपुर खीरी। शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक हुई तेज बारिश ने किसानों को दोहरी मार दी है। दो दिन की बारिश के बाद मौसम सुधरा तो किसान जल्दी फसलों को ठिकाने लगाने में जुट गए। बहुत से किसानों ने गेहूं काटना शुरू कर दिया मगर रात में हुई बारिश ने खेत में खड़ी और काटी गई फसल को भी तबाह कर दिया। किसानों ने प्रशासन पर घर बैठे फर्जी रिपोर्ट बनाने का आरोप लगाया है।
अमीरनगर में शुक्रवार की रात तेज हवाओं के साथ हुई बारिश को देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। गनीमत यह रही की इस बारिश से गेहूं और सरसों की फसल ज्यादा प्रभावित नहीं हुई। क्षेत्र के किसानों का कहना है पिछले सप्ताह तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से किसानों की फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। इसीलिए इस बारिश और हवाओं से फसलों पर खास फर्क नहीं पड़ा है। फिर भी लगातार खराब चल रहे मौसम से तैयार खड़ी फसलों को नुकसान हो रहा है। मार्च के अंत में गेहूं की कटाई का काम तेजी से शुरू हो जाता था। इस बार अभी किसानों को गेहूं कटाई के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
मोहम्मदी में बर्बाद फसलों का सर्वे करते हुए कोई भी कर्मचारी नहीं देखा गया। जबकि बताया जा रहा है कि फसल नुकसान की सर्वे रिपोर्ट प्रशासन तक पहुंच गई है। तहसील प्रशासन महज आठ से 10 प्रतिशत नुकसान होने का दावा कर रहा है। जबकि किसानों का कहना है कि फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। एसडीएम पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि सर्वे तहसीलदार ने कराया है, जिसमें आठ से 10 प्रतिशत तक नुकसान का आंकलन हुआ है। 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा देने का प्रावधान है।
किसानों का कहना है कि जो गेहूं खेतों में पलट गया। इससे फसल उत्पादन कम होना निश्चित है। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा। गेहूं गिरने से पैदावार में काफी गिरावट आ सकती है। केहुआ के किसान अमरीश सिंह कहते हैं कि खेतों में गेहूं गिरने से काफी नुकसान हुआ है और अनुमान है कि 6 से 7 क्विंटल प्रति एकड़ में उपज कम हो जाएगी लेखपाल ने गांव में आकर सर्वे नहीं किया।
खेत में गिरा पड़ा गेहूं
खेत में गिरा पड़ा गेहूं
खेत में गिरा पड़ा गेहूं
खेत में गिरा पड़ा गेहूं