लखीमपुर खीरी। अप्रैल माह में मितौली थाना पुलिस की हिरासत में आशाराम की मौत होने के मामले में नामजद मुख्य आरक्षी और सिपाही को निलंबित किया गया है। इस घटना में आशाराम के पुत्र ने तहरीर देकर पिपरझला पिकेट चौकी प्रभारी व मुख्य आरक्षी बृजपाल और जस्सी नाम के सिपाही पर हत्या का आरोप लगाया था।
मितौली थाना क्षेत्र के ग्राम पकरिया जलालपुर निवासी अनूप की पुत्री अंशू की गला दबाकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। अंशू का शव घर से सौ मीटर दूर झाड़ियों से बरामद हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की थी, इधर परिजनों ने पड़ोसी आशाराम पर शक जाहिर करते हुए पुलिस को तहरीर दी थी।
पुलिस ने 12 अप्रैल को आशाराम को बुलाया था। पूछताछ के दौरान पुलिस हिरासत में आशाराम की मौत हो गई थी। मौत की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे परिजनों ने पुलिस पिटाई से आशाराम की मौत होने का आरोप लगाते हुए हंगामा काटा था। शव रखकर जाम भी लगा दिया था। इस मामले में मृतक आशाराम के पुत्र रोहित कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर पिपरझला चौकी इंचार्ज नाम अज्ञात व मुख्य आरक्षी बृजपाल व जस्सी नाम के सिपाही पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
घटना के दो महीने बीत जाने के बाद आखिरकार दोषी सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। एसपी गणेश प्रसाद साहा ने बताया कि आचार संहिता लगी होने के चलते कार्रवाई में विलंब हुआ। सिपाहियों पर कार्रवाई होने के साथ ही अब परिजनों को न्याय मिलने की आस दिखाई दे रही है।