बच्चे के गाल पर कुत्ते के काटने के निशान। संवाद
पलियाकलां। चंदनचौकी इलाके के गांव बुद्धापुरवा में पागल कुत्ते के हमले के बाद ग्रामीण अब भी दहशत में हैं। पांच लोगों को घायल करने वाले कुत्ते को ग्रामीणों ने पीटकर मार डाला, लेकिन डर का माहौल अभी खत्म नहीं हुआ है। अन्य कुत्तों में संक्रमण की आशंका के चलते लोग रात में परिवार के साथ छतों पर सोने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मरने से पहले कुत्ते ने गांव के कई अन्य आवारा जानवरों को भी काटा था। इसी डर से गांव में महिलाओं और बच्चों का बाहर निकलना लगभग बंद हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि पागल कुत्ते के काटने के कुछ देर बाद ही दो पिल्लों की भी मौत हो गई थी।
बृहस्पतिवार को गांव में कुत्ते ने करीब तीन घंटे तक आतंक मचाया। सबसे पहले उसने सात वर्षीय दिवांश पर हमला कर उसके मुंह और हाथ को घायल कर दिया।
इसके बाद कुत्ते ने नल पर कपड़े धो रही सुनीता पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वह घर के अंदर बेड पर चढ़ गईं, लेकिन कुत्ता वहां भी पहुंच गया और उनके दोनों हाथों को काट लिया। बाद में कुत्ते ने अरमान, अंकित और एक घुमंतू परिवार के बच्चे को भी घायल कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि वहां एंटी रेबीज इंजेक्शन न होने की बात कहकर केवल टिटनेस का टीका लगाया गया और बाद में जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
हालांकि, सीएचसी चंदनचौकी की अधीक्षक डॉ. रिंकी राना ने इन आरोपों से इनकार कर कहा कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध थी और सभी घायलों को तत्काल वैक्सीन लगाई गई थी। गंभीर और गहरे घाव होने के कारण मरीजों को रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया, क्योंकि यह इंजेक्शन सामान्यत: जिला अस्पताल में ही है।