नेपाली हाथियों ने फसल रौंदी, मड़ैया उजाड़ी।
बांकेगंज। नेपाल के शुक्लाफाटा नेशनल पार्क से चलकर किशनपुर सेंक्चुरी के मड़हा सेक्शन में दो अलग-अलग झुंडों में पहुंचे करीब 45 हाथियों में से 40 हाथियों का एक बड़ा झुंड चार दिन पहले गुपचुप ढंग से नेपाल वापस चला गया। बाकी बचे पांच हाथियों की भी लोकेशन न मिलने के कारण वन विभाग का अनुमान था कि यह भी वापस चले गए होंगे। लेकिन पांचों हाथी मड़हा के घने जंगलों में तीन दिन तक छिपे रहे और रविवार रात किसानों की फसलें रौंद डालीं।
रविवार रात किसान ही नहीं वनकर्मी भी हैरान रह गए, जब मड़हा जंगल से निकल पांचों हाथी बफरजोन की मैलानी रेंज से सटे सुल्तानपुर गौटिया गांव के खेतों में जा पहुंचे। हाथियों ने किसान रामू, सुरेश, सोहन की गन्ना फसल को बर्बाद कर दिया। हाथियों ने सोहन के खेत में पड़ी मड़ैया भी तहस-नहस कर डाली। किसान आश्वस्त थे कि हाथियों के चले जाने के बाद उनकी फसलों को कोई खतरा नहीं है। फसलों की निगरानी न होने से हाथियों को खुला मैदान मिल गया और उन्होंने जमकर उत्पात मचाया। निगरानी टीमों के मुताबिक, सोमवार सुबह हाथियों की लोकेशन मड़हा में मिली है।
नेपाल से आए जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड वापस चला गया था, लेकिन पांच हाथी अब भी मड़हा में डेरा डाले हैं। जिनकी तीन दिन से कोई लोकेशन नहीं मिल रही थी। रविवार रात इन हाथियों ने जंगल से सटे खेतों में उत्पात मचाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। अब इन हाथियों की निगरानी फिर से तेज कर दी गई है।
- ललित वर्मा, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व