एक साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी जांच
बाढ़ राहत घोटाले के आरोपी लेखपाल छत्रपाल का वेतन बहाल हो गया है। करीब एक साल बीतने के बाद भी मामले की जांच पूरी नहीं हो सकी है। बाढ़ राहत चेक घोटाले के आरोपी लेखपाल और रिटायर्ड तहसीलदार की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस ने भी मामले की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
ग्राम पंचायत लालपुर में लेखपाल छत्रपाल ने बाढ़ राहत की चेेक लाभार्थी को न देकर दलालों को सौंप दी थी। दलालों ने भारतीय स्टेट बैंक में लाभार्थियों के नाम से फर्जी आईडी लगाकर खाते खुलवा लिए और बाढ़ राहत चेक का पैसा निकाल लिया था। इसका खुलासा तब हुआ जब बैंक से खाता खुलने की सूचना लाभार्थियों को भेजी गई। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्कालीन डीएम ने मामले की जांच के आदेश एसडीएम निघासन को दिए थे। स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक ने मंझलीपुरवा गांव के चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और सरकारी धन का गबन करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इस मामले में पुलिस ने शुक्ल प्रसाद यादव समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचक दरोगा वीर सिंह ने इस मामले में विवेचना के दौरान लेखपाल छत्रपाल और रिटायर्ड तहसीलदार रामऔतार को घोटाले का दोषी पाते हुए इनके खिलाफ भी उन्हीं धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। तत्कालीन एसडीएम ने जांच के दौरान लेखपाल को दोषी पाते हुए आरोपी लेखपाल का वेतन रोक दिया था। उधर बड़ा मामला होने के कारण विवेचक दरोगा ने मामले की जांच प्रदेश की किसी बड़ी एजेंसी से कराने की मांग की थी। इसके बावजूद अब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले में लेखपाल का वेतन भी बहाल हो गया है।
आरोपी लेखपाल को मिली बाढ़ प्रभावित तीन ग्राम पंचायतें
लालपुर में बाढ़ राहत घोटाला करने वाले आरोपी लेखपाल को लालपुर से तो हटा दिया गया। उसके स्थान पर सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित और तहसील की बड़ी ग्राम पंचायत मूडा के अलावा ऊधौनगर और मांझा दे दी गई है। लेखपाल के इस प्रमोशन की बात चर्चा का विषय बनी हुई है।
मामले की जानकारी नहीं थी। यदि बाढ़ राहत घोटाले के आरोपी लेखपाल का वेतन बहाल हो गया है तो मालूम करेंगे कि किन परिस्थितियों में उसका वेतन बहाल हुआ है। यदि गलत ढंग से वेतन बहाल किया गया है तो दोबारा रोका जा सकता है। मामले की जांच दोबारा शुरू कराई जाएगी। यदि आरोपी लेखपालों के पास बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतें हैं तो वापस ली जाएंगी।
-लव कुमार एसडीएम, निघासन