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तकनीकी रिपोर्ट में खेल... दस यात्रियों की हत्यारी बस पास

सार

खमरिया हादसे में दस लोगों की मौत के बाद इस मामले की जांच में भी खेल चल रहा है।सारा दोष मिनी ट्रक चालक का बताते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी गई और इस पूरी कार्रवाई का आधार बनी है टेक्निकल रिपोर्ट।सबसे बड़ी बात यह है कि ये सारे चालान दूसरे जिलों में हुए हैं।
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी। खमरिया हादसे में दस लोगों की मौत के बाद इस मामले की जांच में भी खेल चल रहा है। 25 बार चालान हो चुकी और ठेका परमिट पर चल रही निजी बस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। सारा दोष मिनी ट्रक चालक का बताते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी गई और इस पूरी कार्रवाई का आधार बनी है टेक्निकल रिपोर्ट।
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पुलिस व संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों ने टेक्निकल रिपोर्ट के बारे में बताया कि पुल पर बने ज्वाइंट जो खांचे की तरह हो गए हैं, उस पर पहुंचते ही मिनी ट्रक चालक ने ब्रेक लगाए थे। इस कारण मिनी ट्रक स्लिप होकर दाहिनी ओर चला गया। मिनी ट्रक अपनी ओर आते देख बस चालक ने बस को दाहिनी ओर मोड़ दिया। इससे दोनों वाहनों के बाएं हिस्से में आमने-सामने की टक्कर हो गई। दोनों वाहनों की दाहिनी साइड सुरक्षित होने के कारण दोनों चालक बच गए। पुलिस की जांच भी इसी टेक्निकल रिपोर्ट के इर्द-गिर्द घूम रही है।
ट्रक ड्राइवर के खिलाफ ये धाराएं लगाईं
279, 337, 338, 304 ए, 427, 184 (मोटर व्हीकल एक्ट 1988) आईपीसी के तहत भीषण हादसे की रिपोर्ट दर्ज की गई। मिनी ट्रक चालक बलजिंदर सिंह कहां है, यह जानकारी पुलिस अभी नहीं दे पा रही है। हादसे के बाद वह न तो घायलों की सूची में है और न ही मृतकों की सूची में नाम है। यह मिनी ट्रक पंजाब के संगरूर जिले में पंजीकृत है। हादसे में गंभीर रूप से एक घायल जसप्रीत सिंह निवासी पंजाब के रूप में पहचान हुई, जो मिनी ट्रक पर सवार हेल्पर हो सकता है।
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‘हादसे की जांच ईसानगर पुलिस कर रही है। पुलिस विवेचना के दौरान यात्रियों के बयान भी दर्ज करेगी, उसके आधार पर बस के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 207 व धारा 86 के तहत परमिट शर्तों के उल्लघंन में परमिट को निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा’
- संदीप कुमार पंकज, आरटीओ प्रवर्तन, लखनऊ मंडल
बस मालिक के खिलाफ नतमस्तक परिवहन विभाग
जो निजी बस हादसाग्रस्त हुई, वह एक भाजपा नेता की बताई जा रही है। दुर्घटना वाले दिन बस में क्षमता से ज्यादा सवारियां थीं। परमिट के हिसाब से बस से सवारियां नहीं ढोई जा सकतीं, क्योंकि इसका परमिट ठेके का था। मतलब किसी बुक की हुई पार्टी को बस द्वारा लाया-ले जाया जा सकता है। इस बस का 25 बार चालान हो चुका था, इसके बाद भी इस पर परिवहन विभाग के किसी अफसर की नजर नहीं पड़ी। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सारे चालान दूसरे जिलों में हुए हैं। इससे साफ है कि अपने जिले में इस बस को अभयदान प्राप्त था। इस मामले में दर्ज की गई रिपोर्ट में भी बस चालक या मालिक के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की गई है, जिससे पुलिस जांच में बस मालिक को आसानी से क्लीनचिट मिल सकती है। मामले की जांच ईसानगर थाने के एसआई जय नारायन यादव को सौंपी गई है।
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