कड़ाके
की ठंड और शीत लहर के बावजूद
शहर के प्रमुख चौराहों पर
तहसील और नगर पालिका प्रशासन
ने अलाव नहीं जलवाए हैं। वहीं
रोडवेज बस अड्डा,
रेलवे
स्टेशन और जिला अस्पताल में
भी अलाव की व्यवस्था न होने
के कारण लोग ठंड में ठिठुरते
रहे।
ठंड से बचने के लिए लोग
कूड़ा-करकट
जला रहे हैैं तो रेलवे स्टेशन
के कैंपस में असहाय और निराश्रित
एक कोने में दुबककर बचने का
प्रयास करते दिखे।
शासन
ने 12
नवंबर
2014
को
ही शीतलहर से निराश्रित और
असहायों को निजात दिलाने के
लिए तहसीलवार धन आवंटित कर
दिया था। प्रत्येक तहसील को
पांच-पांच
लाख रुपये कंबल वितरण और 50-50
हजार
रुपये अलाव जलाने के लिए मिले
हैं। इस क्रम में डीएम गौरव
दयाल ने 21
नवंबर
को आदेश जारी कर नगर पंचायत,
नगर
पालिका और ग्रामीण क्षेत्रों
में कैंप लगाकर कंबल वितरण
कराने के लिए समस्त एसडीएम,
तहसीलदार
और अधिशासी अधिकारियों को 10
दिसंबर
तक का समय दिया था लेकिन अभी
तक अमल नहीं हुआ हैै। ‘अमर
उजाला’ ने मंगलवार को शासन-प्रशासन
की तैयारियां और इंतजाम जानने
की कोशिश तो तस्वीर दावों के
उलट कुछ और ही दिखी।
सुबह
8:30 बजे,
रोडवेज
बसअड्डा
शहर
के बीचो-बीच
स्थित रोडवेज बसअड्डा पर
सैकड़ों मुसाफिरों का आना-जाना
होता है। पुलिस पिकेट भी है।
बस की प्रतीक्षा करने वाले
यात्रियों को ठंड से बचाव के
लिए यहां अलाव नहीं जलाया गया
है।
सुबह
8:40 बजे,
रेलवे
स्टेशन
रेलवे
स्टेशन के बाहर निराश्रित और
असहाय ठंड में ठिठुरते मिले।
तो कुछ रजाई और कंबल ओढ़कर खुद
को ठंड से बचाने का प्रयास
करते दिखे। यहां सैकड़ों
यात्रियों का आवागमन रहता
हैै और निराश्रित लोगों की
पनाहगाह भी हैै।
सुबह
8:50 बजे,
मालगोदाम
गेट
मालगोदाम
गेट के बाहर कुछ ठेला मजदूरों
ने ठंड से बचाव के लिए निजी
साधनों का प्रयोग कर अलाव
जलाया। चंद लकड़ियां दर्जनों
की तादात में मजदूरों को ठंड
से निजात दिलाने में बेअसर
साबित हो रही थीं।
सुबह
9:00 बजे,
सदर
चौराहा
शहर
के सबसे व्यस्त सदर चौराहे
पर भी अलाव नहीं जला है। कोतवाली
और तहसील कार्यालय भी यहां
से कुछ दूरी पर ही है। खास यह
है कि सुबह से ग्रामीणों
क्षेत्रों से आकर मजदूर यहां
खडे़ होते हैं जो अलाव न जलने
से ठंड में ठिठुरते रहे।एडीएम हरिकेश
चौरसिया ने बताया कि नगर
के प्रमुख चौराहों और चिह्नित
स्थलों पर अलाव जलवाने के लिए
नगर पालिका के ईओ को निर्देश
जारी किए गए हैं। कलक्ट्रेट
समेत अन्य स्थानों पर अलाव
जल्दी ही जलवा दिए जाएंगे।
साथ ही निराश्रित और असहायों
को कंबल वितरण कराया जाएगा।
लापरवाही करने वाले अधिकारी
और कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई
की जाएगी।