एसएसबी भारत-नेपाल सीमा पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा। इसके तहत सशस्त्र सीमा बल के कुछ जवानों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस टीम के जवान सिविल ड्रेस में रहकर सीमा के आरपार जाने वाले लोगों की निगरानी और तलाशी लेने का काम करेंगे। सीमा पर रहने वाले स्थानीय लोगों से एसएसबी के संबंध सुधारने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
एसएसबी के डीआईजी उपेंद्र प्रकाश बालोदी ने बताया कि यह निर्णय एसएसबी के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय पर आईजी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों की बैठक में किया गया है। बैठक में तय किया है कि एसएसबी भारत-नेपाल और भारत-भूटान की सीमाओं पर यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगी।
उन्होंने बताया कि सिविल ड्रेस में तलाशी लेने का मकसद है कि सीमा क्षेत्र के दोनों ओर रहने वाले स्थानीय लोगों के साथ बल के अच्छे संबंध बनें। उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखने में आया कि वर्दी में गहन चेकिंग के दौरान एक विशेष प्रकार का डर पैदा होता है। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत एसएसबी के कुछ कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी क्रम में चार से छह फरवरी तक सातवीं वाहिनी नानपारा में एक कार्यशाला लगाई जाएगी। कार्यशाला में भारत-नेपाल के कई विभागों के अधिकारी, एनजीओ और विशिष्ट लोग हिस्सा लेंगे। डीआईजी ने बताया कि प्रशिक्षित जवानों को निर्देश दिया जाएगा कि वे तलाशी के दौरान लोगों से अच्छा व्यवहार करें। यह कार्य सबसे पहले रुपइडिहा सीमा से शुरू करके धीरे-धीरे सभी सीमा क्षेत्रों में शुरू किया जाएगा।