लखीमपुर खीरी। विश्व थैलेसीमिया दिवस (8 मई) पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को इस गंभीर आनुवंशिक रक्त रोग के प्रति जागरूक करते हुए विवाह से पहले थैलेसीमिया जांच कराने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच कराकर आने वाली पीढ़ी को इस बीमारी से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि थैलेसीमिया शरीर में स्वस्थ हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को प्रभावित करता है। यह बीमारी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है-थैलेसीमिया माइनर और थैलेसीमिया मेजर।
उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया माइनर से प्रभावित व्यक्ति सामान्य जीवन जीता है और कई बार उसे बीमारी की जानकारी भी नहीं होती। हालांकि, यदि दो थैलेसीमिया माइनर युवक-युवती विवाह करते हैं तो उनके बच्चों में थैलेसीमिया मेजर होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे बच्चों को हर 15 से 20 दिन में खून चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. राकेश ने बताया कि थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने के साथ महंगी दवाओं और लगातार इलाज की जरूरत होती है। इससे परिवार पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है। कई बार समय पर खून न मिलने पर मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार थैलेसीमिया की जांच सामान्य ब्लड टेस्ट से आसानी से कराई जा सकती है और इसकी लागत भी अधिक नहीं होती। उन्होंने लोगों से अपील की कि विवाह से पहले ब्लड ग्रुप के साथ थैलेसीमिया स्क्रीनिंग भी जरूर कराएं। खासतौर पर जिन परिवारों में पहले से थैलेसीमिया के मरीज हैं, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।