लखीमपुर खीरी। कभी बुजुर्गों और गांधीवादियों की पहचान समझी जाने वाली खादी का अब युवाओं के बीच नया दौर शुरू हो चुका है। पुरानी रंगत पर मॉर्डन तड़का उन्हें बहुत पसंद आ रहा है। शहर में संचालित चार खादी की दुकानों पर इन दिनों अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है।
दुकानदारों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में खादी की बिक्री में लगातार इजाफा हुआ है, जिसमें युवाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। आधुनिक डिजाइनों और आरामदायक रंगों के संगम से खादी खूब पसंद की जा रही है। दुकानदार मोहनजी शुक्ला और उमेश कुमार का कहना है कि खादी की सदरी, शर्ट, कोट, कुर्ता-पायजामा जैसे परिधानों की मांग बढ़ी है। युवा वर्ग खादी को न सिर्फ आरामदायक बल्कि स्टाइलिश भी मान रहा है। कॉलेज, दफ्तर और सामाजिक कार्यक्रमों में खादी के कपड़े पहनना अब आम होता जा रहा है।
हल्की ठंड के मौसम में खादी के हल्के ब्लैंकेट, चादर और कंबल की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है। ये उत्पाद न केवल गर्माहट देते हैं, बल्कि त्वचा के लिए भी अनुकूल माने जाते हैं। खादी पर्यावरण के अनुकूल और स्वदेशी होने के कारण भी युवाओं की पसंद बन रही है। खादी आज परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संगम बन चुकी है, जो युवाओं को तेजी से अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
-
दुकानों पर छूट के बाद मूल्य
सदरी- 330 रुपये से लेकर 2450 रुपये तक
कोट- 2400 रुपये से लेकर 3800 रुपये तक
कुर्ता-पायजामा- 490 रुपये से लेकर 900 रुपये तक
शर्ट-140 रुपये से लेकर 1400 रुपये तक
शिल्क का कपड़ा-770 रुपये से 2500 रुपये तक
बेडशीट- 210 रुपये से लेकर 1100 रुपये तक