दुधवा नेशनल पार्क क्षेत्र में हुई चार मुुठभेड़ों के दौरान की गई 51 राउंड हवाई फायरिंग के मामले में डीएम किंजल सिंह ने मजिस्ट्रेेटी जांच के आदेश दिए हैं, जिसके लिए पलिया, गोला और मोहम्मदी के एसडीएम को नामित कर दिया है। यह चारों मुुठभेड़ वन क्षेत्र के इंडो-नेपाल बार्डर पर हुई थीं, लेकिन इन मुठभेड़ के संबंध में गौरीफंटा और संपूर्णानगर थाने में कोई मुुकदमा दर्ज नहीं कराया गया हैै। डीएम ने संबंधित एसडीएम से एक सप्ताह के अंदर जांच आख्या तलब की है।
दुधवा पार्क के उपनिदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर दिसंबर 2014 से अगस्त 2015 के बीच दुुधवा पार्क क्षेत्र के सठियाना, बनकटी और गौरीफंटा रेंज में चार बार अपराधियों से मुुठभेड़ की सूचना दी गई थी, जिसमें मुठभेड़ के दौरान पीआरडी जवानों द्वारा 51 राउंड फायरिंग करने की बात कही गई। इसके आधार पर उपनिदेशक ने 303 बोर के 51 कारतूस स्टाक से खारिज करने की संस्तुति कर दी। डीएम किंजल सिंह ने इन मुठभेड़ों के संबंध में कोतवाली गौरीफंटा एवं थाना संपूर्णानगर से जानकारी मांगी, तो पता चला कि इन मुुठभेड़ों के संबंध में थाना स्तर पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया है। डीएम ने इन मुठभेड़ों की मजिस्ट्रीरियल जांच के आदेश करते हुए एसडीएम को नामित कर दिया है। डीएम ने चारों मुठभेड़ों की जांच एक सप्ताह के अंदर पूरी कर आख्या रिपोर्ट तलब की है।
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पार्क क्षेत्र में इन तिथियों में हुई मुठभेड़
27 दिसंबर 2014 को सठियाना रेंज के सुमेरनगर बीट की अंतर्राष्ट्रीय भारत-नेपाल सीमा के निकट अपराधियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें 10 राउंड फायरिंग की गई। इस मामले की जांच एसडीएम पलिया आलोक कुमार करेंगे। दूसरी मुठभेड़ 16 जुलाई 2015 को बनकटी रेंज के अंबरगढ़ बीट संख्या 04 भारत-नेपाल सीमा के निकट हुई, जिसमें 11 राउंड फायरिंग की गई। इसकी जांच एसडीएम गोला विनोद कुमार गुप्ता करेंगे। तीसरी मुठभेड़ 20 अगस्त 2015 को गौरीफंटा रेंज की वन चौकी कीरतपुर में भारत-नेपाल सीमा के निकट हुई, जिसमें तीन राउंड फायरिंग की गई। इस मामले की जांच एसडीएम मोहम्मदी नागेंद्र सिंह को सौंपी गई है। चौथी मुठभेड़ एक अगस्त 2015 को बनकटी रेंज के अंबरगढ़ बीट संख्या 04 सठियाना रेंज के क्रम संख्या 05 में भारत-नेपाल सीमा पर हुई थी। इसमें 27 राउंड की गई फायरिंग की जांच एसडीएम गोला विनोद कुमार गुप्ता करेेंगे।
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पार्क प्रशासन पर दबाव के लिए तो नहीं कार्रवाई
दुधवा पार्क प्रशासन और डीएम के बीच कुुछ समय से चली आ रही तकरार का अभी तक पटाक्षेप नहीं हो सका है, बल्कि पार्क में चलने वाली टैैक्सियों के चालक, गाइड और कर्मचारी कई दिनों से डीएम पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि डीएम के निर्देश पर वन क्षेत्र में हुए कटान, अवैध टैक्सी संचालन आदि की जांच एवं कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में वर्ष 2014 और 2015 में हुई मुठभेड़ों की मजिस्ट्रीरियल जांच के आदेश डीएम ने दिए है, जिसे पार्क प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति का एक हिस्सा मानकर देखा जा रहा है।